DMK का केंद्र सरकार के खिलाफ परिसीमन बिल पर विरोध प्रदर्शन
DMK का विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली। द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने गुरुवार को केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें प्रस्तावित परिसीमन बिल पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की। यह बिल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन लाने का इरादा रखता है। संवैधानिक संशोधन बिल का कार्यान्वयन 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुसार संशोधन से संबंधित है। इसका उद्देश्य राज्य विधानसभाओं और लोकसभा की संरचना में बदलाव करना है। DMK के नेता आरएस भारती, टीकेएस एलंगोवन और कनिमोझी सोमू ने चेन्नई में पार्टी के मुख्यालय पर इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित परिसीमन बिल की एक प्रति जलाई और केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ नारेबाजी की।
यह घटना तब हुई जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी सुबह के समय प्रस्तावित परिसीमन बिल की एक प्रति जलाई। स्टालिन ने पूरे राज्य में परिसीमन विरोधी आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए एक काला झंडा भी फहराया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह विरोध पूरे तमिलनाडु में फैल जाएगा और भाजपा का अहंकार टूट जाएगा। उन्होंने कहा कि मैंने उस काले कानून की एक प्रति जलाकर एक और आग जलाई है, जो तमिल लोगों को उनकी अपनी ज़मीन पर शरणार्थी बना देता है। यह आग पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैलेगी और भाजपा के अहंकार को झुका देगी। प्रस्तावित परिसीमन बिल का विरोध लंबे समय से जारी है, और हाल ही में केंद्र द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के लिए मसौदा संशोधन बिलों को मंजूरी देने के बाद यह विरोध और तेज हो गया है। विपक्ष ने चुनाव के मौसम में संसद का विशेष सत्र बुलाने में दिखाई गई जल्दबाज़ी पर भी सवाल उठाए हैं। सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है, जिसके लिए वह 2023 के अधिनियम में संशोधन करेगी और परिसीमन प्रक्रिया को 2027 की जनगणना से अलग कर देगी।
