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DRDO का नया AI इमेजिंग सैटेलाइट 'प्रज्ञा': आंतरिक सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत

DRDO ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को AI से लैस इमेजिंग सैटेलाइट 'प्रज्ञा' सौंपा है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा। यह स्वदेशी तकनीक सुरक्षा एजेंसियों को वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करेगी। इसके साथ ही, नौसेना के लिए एयर-ड्रॉपेबल कंटेनर 'ADC-150' का सफल परीक्षण किया गया है, जो समुद्री अभियानों में मदद करेगा। इन दोनों तकनीकों से भारत की सुरक्षा में नई मजबूती आएगी।
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DRDO का नया AI इमेजिंग सैटेलाइट 'प्रज्ञा': आंतरिक सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली में DRDO का महत्वपूर्ण कदम


नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। DRDO ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक अत्याधुनिक AI इमेजिंग सैटेलाइट सिस्टम 'प्रज्ञा' सौंपा है।


सोमवार को कर्तव्य भवन-3 में आयोजित एक समारोह में, DRDO के सचिव समीर वी कामत ने गृह सचिव को यह सिस्टम सौंपा। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक बनाने का उद्देश्य रखता है।


प्रज्ञा सिस्टम की विशेषताएँ

'प्रज्ञा' को DRDO की प्रयोगशाला सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CIAR) द्वारा पूरी तरह से भारत में विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है, जो गृह मंत्रालय को वास्तविक समय में सटीक जानकारी प्रदान करेगा और त्वरित निर्णय लेने में सहायता करेगा।


यह सिस्टम देश के संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए तैयार किया गया है, जिससे सुरक्षा बलों को आतंकवादियों और नक्सलियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने में मदद मिलेगी।


आतंकवाद और नक्सलवाद पर सख्ती

'प्रज्ञा' सिस्टम की सहायता से गृह मंत्रालय की सुरक्षा एजेंसियाँ तेजी से कार्य कर सकेंगी। यह तत्काल निर्णय लेने, संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी और आतंकवादी-नक्सली अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


DRDO के अधिकारियों का मानना है कि इससे भारत की आंतरिक सुरक्षा की दीवार और मजबूत होगी, और पूरी प्रक्रिया स्वदेशी होने के कारण विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।


नौसेना को मिली नई ताकत

DRDO ने नौसेना के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। गोवा के तट पर स्वदेशी एयर-ड्रॉपेबल कंटेनर 'ADC-150' के चार सफल परीक्षण किए गए हैं। 21 फरवरी से 1 मार्च के बीच, नौसेना के P-8I विमान से यह कंटेनर हवा से गिराया गया, और सभी परीक्षण सफल रहे। यह कंटेनर 150 किलोग्राम तक सामान ले जाने में सक्षम है, जिसमें दवाइयाँ, खाद्य सामग्री या स्पेयर पार्ट्स शामिल हो सकते हैं।




गहरे समुद्र में तैनात जहाजों तक आवश्यक सामान पहुँचाना अब और भी आसान हो जाएगा। आगरा, बेंगलुरु, हैदराबाद और विशाखापत्तनम की प्रयोगशालाओं ने मिलकर इसे विकसित किया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह तकनीक नौसेना के अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाएगी।


आत्मनिर्भर भारत की नई मिसाल

DRDO के इन दोनों प्रयासों से यह स्पष्ट है कि भारत अब अपनी सुरक्षा को स्वदेशी तकनीक से सशक्त कर रहा है। 'प्रज्ञा' सिस्टम आंतरिक सुरक्षा के लिए और 'ADC-150' समुद्री अभियानों के लिए नई संभावनाएँ खोल रहे हैं। आने वाले समय में इनका पूरा लाभ सुरक्षा बलों को मिलेगा।