IMF प्रमुख ने वैश्विक आर्थिक संकट की चेतावनी दी
IMF प्रमुख की चेतावनी
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि यदि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का समाधान नहीं होता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो दुनिया को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
जॉर्जीवा ने IMF और विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग के दौरान बताया कि 28 फरवरी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधाओं के कारण तेल और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि हुई है। यह जलमार्ग वैश्विक स्तर पर तेल और उर्वरक की आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सप्लाई में रुकावट से विशेष रूप से आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उर्वरकों की आपूर्ति जल्दी सामान्य नहीं होती है, तो खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। जॉर्जीवा ने कहा कि कम आय वाले देशों में लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं, इसलिए वहां इसका प्रभाव अधिक गंभीर होगा।
जॉर्जीवा ने केंद्रीय बैंकों को सलाह दी कि वे ब्याज दरों में जल्दबाजी से बदलाव करने से बचें और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें। जिन देशों में महंगाई पहले से नियंत्रण में है, वहां 'वेट एंड वॉच' रणनीति अपनाई जा सकती है, जबकि जिन देशों में केंद्रीय बैंकों की विश्वसनीयता कम है, वहां सख्त कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है।
IMF ने यह भी संकेत दिया है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो सदस्य देशों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है। वर्तमान में संस्था के 39 कार्यक्रम चल रहे हैं और भविष्य में कई अन्य देशों को मदद की आवश्यकता हो सकती है। अनुमान है कि 20 से 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त फंडिंग की मांग हो सकती है। जॉर्जीवा ने सरकारों को सलाह दी कि आम लोगों को राहत देने के लिए उठाए जाने वाले कदम सोच-समझकर हों। बिना लक्ष्य के उठाए गए कदम, जैसे निर्यात पर रोक या बड़े पैमाने पर टैक्स कटौती, महंगाई की समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
