ISRO का PSLV C-62 मिशन: पहली लॉन्चिंग में तकनीकी खामी
ISRO की नई चुनौती
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 12 जनवरी को एक महत्वपूर्ण मिशन का प्रयास किया। इसरो ने अपने सैटेलाइट EOS-N1 को PSLV C-62 के तहत अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई थी। इस सैटेलाइट के माध्यम से सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान और पर्यावरण की निगरानी में सुधार की उम्मीद थी। यह लॉन्च सुबह लगभग 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्पेस पोर्ट से किया गया। हालांकि, तकनीकी खामी के कारण यह मिशन सफल नहीं हो सका।
इसरो ने 2026 के प्रक्षेपण कैलेंडर की शुरुआत ‘पीएसएलवी-सी62’ मिशन के साथ की, जिसमें पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘ईओएस-एन1’ और 14 अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य था। इस मिशन में शामिल सह-यात्री उपग्रह देशी और विदेशी ग्राहकों के थे, जिन्हें सुबह 10:17 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया।
मुख्य पेलोड DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो सीमा निगरानी और पर्यावरण मॉनिटरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह PSLV के लिए एक महत्वपूर्ण वापसी थी, खासकर 2025 की असफलता के बाद।
PSLV C62/EOS N1 लॉन्च का ऑटोमेटिक सिक्वेंस प्रारंभ किया गया, जिससे यह संकेत मिला कि सभी पैरामीटर्स सही हैं। इसके बाद अंतिम परीक्षण किया गया और 10:18:30 पर लिफ्ट ऑफ हुआ। लेकिन, थर्ड फेज के अंतिम चरण में तकनीकी खामी के कारण यह मिशन असफल रहा।
The PSLV-C62 mission encountered an anomaly during end of the PS3 stage. A detailed analysis has been initiated.
— ISRO (@isro) January 12, 2026
