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ISRO की नई योजना: आम नागरिकों को भी मिलेगा अंतरिक्ष यात्री बनने का मौका

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आम नागरिकों को अंतरिक्ष यात्री बनने का अवसर देने की योजना बनाई है। इस नई पहल के तहत, ISRO अपने अगले एस्ट्रोनॉट बैच में सिविलियन विशेषज्ञों को शामिल करने की सोच रहा है। हालांकि, इसके लिए विशेष योग्यताओं की आवश्यकता होगी। इस योजना का उद्देश्य भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक अनुसंधान में योगदान देना है। जानें इस महत्वपूर्ण बदलाव के पीछे के कारण और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
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ISRO की नई योजना: आम नागरिकों को भी मिलेगा अंतरिक्ष यात्री बनने का मौका

भारत में अंतरिक्ष यात्रा का नया अध्याय


नई दिल्ली। भारत में अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए अब तक केवल एक ही महत्वपूर्ण शर्त थी - 'मिलिट्री टेस्ट पायलट' होना। लेकिन अब यह नियम जल्द ही बदल सकता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने आगामी एस्ट्रोनॉट बैच में आम नागरिकों को शामिल करने की योजना बना रहा है।


हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि कुछ बड़ा होने वाला है। गगनयान मिशन के पहले बैच में केवल भारतीय वायु सेना के टेस्ट पायलटों का चयन किया गया था, क्योंकि प्रारंभ में सुरक्षा और सिस्टम की जांच सबसे महत्वपूर्ण थी।


अब ISRO की चयन समिति ने सुझाव दिया है कि अगले बैच में एक 'मिश्रित' टीम होनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इस नए बैच में लगभग 6 मिशन पायलट (मिलिट्री बैकग्राउंड वाले) और 4 सिविलियन विशेषज्ञ (STEM बैकग्राउंड वाले) शामिल किए जा सकते हैं। इसका अर्थ है कि वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ भी भविष्य में भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन का हिस्सा बन सकेंगे।


आवेदन की प्रक्रिया और योग्यताएँ

कौन कर सकेगा अप्लाई?


यह अवसर सभी के लिए नहीं होगा, बल्कि इसके लिए विशेष योग्यताओं की आवश्यकता होगी। ISRO मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता देगा जिनका विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में मजबूत बैकग्राउंड है। इसमें इंजीनियरिंग, वैज्ञानिक अनुसंधान या किसी विशेष तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे।


इन सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स की भूमिका केवल स्पेसक्राफ्ट के सफर तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उनका मुख्य कार्य अंतरिक्ष में जटिल वैज्ञानिक प्रयोग करना और वहां के एडवांस सिस्टम को संभालना होगा। इसके साथ ही, ISRO अपने मिलिट्री कोटे में भी विस्तार करने की योजना बना रहा है। इससे अब केवल फाइटर पायलट ही नहीं, बल्कि कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलटों के लिए भी अंतरिक्ष की राह आसान हो जाएगी।


बदलाव की आवश्यकता और भविष्य की योजनाएँ

आखिर इस बड़े बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?


यदि यह योजना कार्यान्वित होती है, तो यह ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। दरअसल, ISRO का लक्ष्य केवल एक बार इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना नहीं है, बल्कि वह भविष्य के लिए बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इनमें नियमित मानव उड़ानें संचालित करना, पृथ्वी की निचली कक्षा में वैज्ञानिक शोध करना और भारत का अपना स्पेस स्टेशन, 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS) तैयार करना शामिल है।


इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक कुशल एस्ट्रोनॉट टीम की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट के अनुसार, ISRO एक ऐसे भविष्य की योजना बना रहा है, जहां साल में कम से कम दो मिशन भेजे जा सकें और क्रू की संख्या को 2 से बढ़ाकर 3 एस्ट्रोनॉट किया जा सके। इसके लिए एस्ट्रोनॉट्स का कुल पूल बढ़ाकर 40 लोगों तक करने की योजना है।


आम नागरिकों की अंतरिक्ष यात्रा की संभावना

क्या आम लोग तुरंत अंतरिक्ष की उड़ान भर पाएंगे?


इसका सीधा उत्तर है- नहीं। भले ही भविष्य में आम नागरिकों का चयन जल्द शुरू हो जाए, लेकिन वे शुरुआती मिशनों का हिस्सा नहीं होंगे। मौजूदा योजना के अनुसार, सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स की पहली उड़ान चौथे क्रू गगनयान मिशन से शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, इस योजना में कई चुनौतियाँ और तकनीकी कार्य बाकी हैं। उदाहरण के लिए, ISRO को एक पूरी तरह से एडवांस एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी तैयार करनी होगी।


इन चुनौतियों के बावजूद, यह एक सकारात्मक संकेत है कि अब भारत में 'एस्ट्रोनॉट बनने' का सपना केवल विशेष बैकग्राउंड या मिलिट्री तक सीमित नहीं रहेगा। यह देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए अंतरिक्ष के नए दरवाजे खोलने जैसा है।


वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सिविलियन मिशन

NASA और सिविलियन मिशन, दुनिया में क्या है ट्रेंड?


वैश्विक स्तर पर देखें तो अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने पहले ही आम नागरिकों को अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। नील आर्मस्ट्रांग का नाम इस संदर्भ में सबसे प्रमुख है, जिन्हें 16 मार्च 1966 को अंतरिक्ष में भेजा गया पहला 'सिविलियन' माना जाता है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि एस्ट्रोनॉट बनने से पहले वे एक नेवी पायलट रह चुके थे।


अगर हम शुद्ध रूप से किसी आम नागरिक या 'स्पेस टूरिस्ट' की बात करें तो अमेरिकी बिजनेसमैन और इंजीनियर डेनिस टीटो ने साल 2001 में इतिहास रचा था। वे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले स्पेस टूरिस्ट बने थे। इससे पहले, अंतरिक्ष का सफर केवल मिलिट्री पायलटों या सरकारी स्पेस प्रोग्राम से जुड़े लोगों तक ही सीमित था। अब भारत का ISRO भी उसी आधुनिक दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए केवल वर्दी नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक का जुनून भी महत्वपूर्ण होगा।