MH370 विमान का रहस्य: 12 साल बाद भी अनसुलझा
दुनिया को झकझोर देने वाला विमान हादसा
नई दिल्ली: 239 यात्रियों की सांसें, एक लापता बोइंग विमान और 12 साल का एक ऐसा खौफनाक सन्नाटा, जिसने पूरी दुनिया को उलझा कर रख दिया है। आज ठीक 12 साल हो गए हैं, लेकिन मलेशियाई एयरलाइंस के फ्लाइट MH370 के गायब होने का रहस्य आज भी उतना ही गहरा है। विमान की तलाश के लिए किए गए सबसे ताज़ा और हाई-टेक प्रयासों ने भी अब हार मान ली है। पानी के भीतर खोज करने वाली अमेरिकी समुद्री रोबोटिक्स कंपनी 'ओशन इनफिनिटी' के अत्याधुनिक रोबोट भी समुद्र की गहराइयों में खाली हाथ रह गए हैं। इस नाकामी के बाद विमान के साथ गायब हुए लोगों के परिजनों का दर्द एक बार फिर छलक उठा है, जो आज भी अपनों को लेकर तमाम सवालों के जवाब मांग रहे हैं।
8 मार्च 2014 को हुआ था विमान का गायब होना
8 मार्च 2014 को आसमान में गायब हुआ विमान
आज से ठीक 12 साल पहले, 8 मार्च 2014 की वह मनहूस सुबह थी, जब मलेशिया एयरलाइंस का बोइंग 777-200 विमान कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए रवाना हुआ था। इस बदनसीब फ्लाइट में 227 यात्री और 12 चालक दल के सदस्य सवार थे। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद यह विशालकाय विमान रडार की स्क्रीन से हमेशा के लिए गायब हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि विमान दक्षिण हिंद महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, लेकिन दुनिया भर की एजेंसियों के व्यापक तलाशी अभियानों के बावजूद आज तक इस हादसे की सटीक जगह या विमान के मलबे का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
खोज अभियान की विफलता
रोबोट और जहाज भी हुए फेल
मलेशियाई परिवहन मंत्रालय ने 3 दिसंबर 2025 को इस 55 दिवसीय विशेष खोज अभियान की अनुमति दी थी। सिंगापुर के ध्वज वाले जहाज 'अर्मडा' ने छह जनवरी से 15 जनवरी के बीच लगभग 7,236.40 वर्ग किलोमीटर के विशाल समुद्री क्षेत्र की गहराई से मैपिंग की। इस हाई-टेक अभियान में पानी के नीचे चलने वाले तीन अत्याधुनिक 'हयूजिन एयूवी' (Hugin AUV) रोबोट्स का इस्तेमाल किया गया। इस सर्च को 24 जनवरी तक बढ़ाया भी गया और पूरा फोकस 7वीं आर्क के दक्षिणी हिस्से पर था, जिसे विमान की अंतिम संभावित स्थिति माना गया था। लेकिन पानी के नीचे लगातार छानबीन के बावजूद कोई भी निर्णायक परिणाम हासिल नहीं हुआ।
परिजनों का दर्द और निराशा
अपनों की राह देख रहे परिजन
इस अभागे विमान में सबसे ज्यादा दो-तिहाई यात्री चीन के थे। इसके अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, भारत, अमेरिका, नीदरलैंड और फ्रांस के नागरिक भी इस फ्लाइट में सवार थे। 12 साल बीत जाने के बाद भी चीनी यात्रियों के परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। उन्होंने हाल ही में एक ओपन लेटर जारी कर मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से अपनी गहरी नाराजगी जताई है। परिजनों का आरोप है कि वे अभियान की कठिनाई को समझते हैं, लेकिन 15 जनवरी के बाद से उनके साथ कोई नई जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे उनकी बेचैनी और बढ़ गई है।
कानूनी कार्रवाई और मुआवजा
कोर्ट ने यात्रियों को मृत घोषित किया
अपनों के लौटने की आस अब कानूनी तौर पर भी खत्म हो चुकी है। इस भयानक हादसे में लापता हुए सभी यात्रियों को कानूनी रूप से मृत घोषित किया जा चुका है। हाल ही में बीजिंग की एक अदालत ने मलेशिया एयरलाइंस को सख्त आदेश देते हुए आठ परिजनों को 29-29 लाख युआन (लगभग 4.10 लाख डॉलर) का भारी-भरकम मुआवजा देने का फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि एयरलाइन को हर परिवार को उनके प्रियजन की मृत्यु, अंतिम संस्कार और मानसिक पीड़ा के लिए यह हर्जाना देना होगा। हालांकि, अभी भी 23 अन्य मामलों पर कोर्ट में सुनवाई जारी है, जबकि 47 मामलों में परिजनों ने एयरलाइन के साथ समझौता कर लिया है और अपने मुकदमे वापस ले लिए हैं।
