NEET UG परीक्षा रद्द होने से छात्रों का भविष्य संकट में
NEET UG परीक्षा की स्थिति
नीट यूजी परीक्षा, जो मेडिकल में दाखिले के लिए आयोजित की जाती है, पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई है। इस स्थिति ने लगभग 23 लाख छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, कई छात्र परीक्षा देकर अपने घर लौट चुके थे, लेकिन अब उन्हें फिर से अपने कोचिंग सेंटर्स के पास लौटना पड़ा है। उन्हें नए सिरे से रहने की व्यवस्था करनी पड़ रही है और फीस भी देनी पड़ रही है। इस स्थिति से छात्रों और उनके परिवारों में मानसिक तनाव बढ़ गया है।
सीबीएसई परीक्षा में गड़बड़ियां
इसी प्रकार, 12वीं बोर्ड की सीबीएसई परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में हुई गड़बड़ियों के कारण लगभग 18 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। दोनों परीक्षाओं में कुछ छात्र समान हो सकते हैं, जिससे कुल मिलाकर 30 लाख से अधिक छात्रों को सरकारी तंत्र ने संकट में डाल दिया है। बच्चों को भरोसा दिलाने के प्रयास केवल समय बर्बाद करने के समान प्रतीत हो रहे हैं।
सरकारी कार्रवाई पर सवाल
मीडिया में यह बताया जा रहा है कि सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं, जैसे कि सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव को हटाना। हालांकि, यह कदम केवल दिखावे के लिए प्रतीत होते हैं। सीबीएसई के चेयरमैन को हटाकर उन्हें कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बना दिया गया है। यह कदम क्या वास्तव में प्रभावी है?
जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें राधा चौहान को जिम्मेदारी दी गई है। यह संयोग है कि राधा चौहान और राहुल सिंह ने पहले एक साथ काम किया है। हालांकि, यह संयोग जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
सीबीएसई की वेबसाइट की समस्याएं
जब 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच शुरू की गई, तो सीबीएसई की वेबसाइट ही काम नहीं कर रही थी। इसके कारण कई बार समय बढ़ाना पड़ा। अंततः यह तय हुआ कि जांच एक जून से शुरू होगी, लेकिन उस दिन वेबसाइट फिर से काम नहीं कर पाई। शिक्षा मंत्री ने कहा था कि वेबसाइट को ठीक करने के लिए दो आईआईटी से मदद ली जा रही है।
भविष्य की परीक्षा की तैयारी
सरकार ने यह नैरेटिव स्थापित करने के लिए आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाया है। हालांकि, किसी भी आईआईटी के पास जादू की छड़ी नहीं है। परिणामस्वरूप, एक जून से साइट शुरू नहीं हो पाई। जब साइट दो जून को शुरू हुई, तब भी कई समस्याएं आईं।
यह स्पष्ट है कि परीक्षा की प्रक्रिया की निगरानी प्रधानमंत्री खुद कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि संबंधित एजेंसियां पूरी तरह से विफल रही हैं।
नीट यूजी परीक्षा के बाद की स्थिति
सीबीएसई की उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी के बाद कुछ तबादले हुए, लेकिन नीट यूजी के पेपर लीक के बाद एनटीए के किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षा मंत्री और उनके मंत्रालय में स्थिति जस की तस बनी रही। कहा जा रहा है कि 21 जून को दोबारा परीक्षा होगी। सवाल यह है कि अगर सिस्टम नाकारा है, तो फिर से 23 लाख बच्चों का भविष्य उसी पर क्यों छोड़ा जा रहा है?
