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NEET-UG पेपर लीक: सीकर में खुला बड़ा नेटवर्क, 28 लाख में बिका पेपर

NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक मामले ने छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। सीकर में एक बड़ा माफिया नेटवर्क सामने आया है, जहां पेपर 30 हजार से लेकर 28 लाख रुपये तक में बेचा गया। जांच में पता चला है कि पेपर नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ और फिर सीकर के काउंसलर के माध्यम से विभिन्न राज्यों में फैल गया। इस मामले में सीबीआई और अन्य एजेंसियां सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं। जानें इस पेपर लीक के पीछे का पूरा सच और कैसे यह मामला सामने आया।
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NEET-UG पेपर लीक: सीकर में खुला बड़ा नेटवर्क, 28 लाख में बिका पेपर

NEET-UG परीक्षा रद्द, छात्रों का भविष्य संकट में


नई दिल्ली: 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय ने 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है, जिसके चलते दिल्ली और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।


सीकर: पेपर लीक का नया केंद्र

इस मामले की सीबीआई जांच का मुख्य केंद्र अब सीकर बन गया है, जिसे राजस्थान का नया कोटा कहा जा रहा है। राजस्थान पुलिस के विशेष ऑपरेशंस ग्रुप ने नासिक से सीकर और फिर पूरे देश में फैले नेटवर्क का खुलासा किया है।


नासिक से शुरू हुआ पेपर लीक का मामला

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियों को संदेह है कि NEET-UG का पेपर नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ। सूत्रों के अनुसार, प्रेस से जुड़े एक व्यक्ति ने पेपर को एक चेन नेटवर्क में डाल दिया, जो बाद में गुरुग्राम में एक डॉक्टर तक पहुंचा। इसके बाद, जयपुर के जमवा रामगढ़ के खटीक नामक व्यक्ति ने डॉक्टर से पेपर खरीद लिया। सीबीआई ने प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े संदिग्ध को हिरासत में लिया है।


सीकर का काउंसलर बना कड़ी

जमवा रामगढ़ से पेपर सीकर के राकेश कुमार मंडावरिया तक पहुंचा, जो बड़े कोचिंग संस्थानों के बाहर MBBS काउंसलिंग एजेंट का काम करता है। यहीं से पेपर वन-टू-वन नेटवर्क के जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड के कोचिंग सेंटरों तक फैल गया। जांच में पता चला कि पेपर को 'गेस पेपर' बताकर बांटा गया। असल में ये पिछले सालों के ट्रेंड पर बनाए गए प्रैक्टिस पेपर थे।


पेपर की कीमत 30 हजार से 28 लाख तक

यह पेपर परीक्षा से लगभग 15 दिन पहले से ही बाजार में था। मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को इसे 30 हजार से 28 लाख रुपये तक में बेचा गया। नागौर का एक छात्र तो परीक्षा से चार दिन पहले सीकर आया और पेपर के लिए 28 लाख रुपये दे दिए। पूछताछ में उसने बताया कि उसे दिल्ली से कॉल आई थी कि 'पेपर आ गया है'।


लालच में खुला नेटवर्क का राज

पेपर माफिया का नेटवर्क गुप्त तरीके से काम करता है, लेकिन इस बार पैसे के लालच में इसका भंडाफोड़ हो गया। राकेश ने 30 हजार में पेपर अपने साथी को बेचा, जो केरल में MBBS कर रहा था। परीक्षा से एक दिन पहले उस छात्र ने पेपर अपने पिता को भेज दिया। उसके पिता सीकर में PG चलाते हैं।


"पापा, ये कल के एग्जाम में आएगा"

छात्र ने मैसेज में लिखा, 'पापा, सीकर के एक दोस्त ने भेजा है। इसे अपने हॉस्टल की लड़कियों को दे दो। कल के एग्जाम में यही आएगा।' PG संचालक ने बिना सोचे पेपर लड़कियों में बांट दिया। 3 मई को एग्जाम के बाद उसने एक कोचिंग टीचर से चेक कराया कि कितने सवाल मैच हुए।


बायोलॉजी-केमिस्ट्री के सभी सवाल हूबहू मिले

चौंकाने वाली बात यह थी कि NEET में पूछे गए बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल उस 281 सवालों वाले 'गेस पेपर' में थे। NEET में कुल 180 सवाल होते हैं। जांच में पता चला कि केमिस्ट्री के 45 सवाल उसी क्रम में थे जैसे असल पेपर में थे। यहां तक कि कॉमा और फुल स्टॉप भी नहीं बदले थे।


NTA से IB तक पहुंची शिकायत

सच्चाई सामने आने पर PG संचालक सीकर के उद्योग नगर थाने गया, लेकिन पुलिस ने इसे अफवाह कहकर टाल दिया। इसके बाद उसने NTA को जानकारी दी। NTA ने इंटेलिजेंस ब्यूरो को सूचित किया और IB ने राजस्थान पुलिस को अलर्ट किया। SOG ने जांच शुरू कर PG संचालक समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया। देहरादून और झुंझुनू में भी छापे मारे गए। MBBS काउंसलर राकेश भी हिरासत में है।


सीकर बना पेपर माफिया का नया अड्डा

जांच अब सीकर और जयपुर पर केंद्रित है। कोटा में एडमिशन घटने के कारण छात्र सीकर जा रहे हैं, जिससे यह बड़ा कोचिंग हब बन गया है। एजेंसियों को संदेह है कि सीकर पेपर लीक नेटवर्क का नया केंद्र बन रहा है। भले ही पेपर पहले जयपुर में लीक हुआ, लेकिन सबसे ज्यादा फैला सीकर में। अब एजेंसियां इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।