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NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले की पाकिस्तान से जुड़ी साजिश का खुलासा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में पाकिस्तान की संलिप्तता का खुलासा किया है। चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ के आतंकियों की भूमिका का विवरण दिया गया है। इस हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी। जानें कैसे साजिश रची गई और आतंकियों ने किस तरह से सुरक्षा व्यवस्था को भेदने की कोशिश की।
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NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले की पाकिस्तान से जुड़ी साजिश का खुलासा

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले की जांच

नई दिल्ली : अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले के संबंध में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने महत्वपूर्ण चार्जशीट पेश की है। इस हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस हमले की योजना पाकिस्तान से बनाई गई थी।


NIA के अनुसार, इस हमले को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने अंजाम दिया। जांच एजेंसी ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन का नियंत्रण सीमा पार से किया जा रहा था। चार्जशीट में लश्कर के आतंकवादी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ को इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है, जो पाकिस्तान के लाहौर से आतंकियों को निर्देश दे रहा था।


NIA ने जानकारी दी कि 15 और 16 अप्रैल को सैफुल्लाह ने तीन आतंकियों — फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी — को बैसरन घाटी में भेजा था। वहां उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों की गतिविधियों की निगरानी की। जांच में यह भी सामने आया कि परवेज और बशीर अहमद नामक दो स्थानीय व्यक्तियों ने पाकिस्तानी आतंकियों को सहायता प्रदान की थी।


जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए आतंकियों ने “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” का दावा करते हुए यह झूठ फैलाने की कोशिश की कि हमला भारत ने खुद करवाया है। हमले के तुरंत बाद TRF ने ‘कश्मीर फाइट’ नामक टेलीग्राम चैनल पर इसकी जिम्मेदारी ली थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कड़ी निंदा के बाद संगठन ने बयान बदलते हुए कहा कि चैनल हैक हो गया था।


NIA के अनुसार, ‘कश्मीर फाइट’ टेलीग्राम चैनल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बट्टाग्राम क्षेत्र से संचालित हो रहा था। ‘TheResistanceFront_OfFcial’ नामक दूसरा चैनल रावलपिंडी से चलाया जा रहा था। चार्जशीट में कई डिजिटल और तकनीकी सबूत पेश किए गए हैं, जो सीधे पाकिस्तान की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।


‘ऑपरेशन महादेव’ में मारे गए आतंकियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए। इनमें से एक फोन लाहौर के ‘कायद-ए-आजम इंडस्ट्रियल एस्टेट’ भेजा गया था, जबकि दूसरा कराची के ‘शाहरा’ इलाके से खरीदा गया था।
हमले के दिन सैफुल्लाह लगातार आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें रियल-टाइम लोकेशन, भागने के रास्ते, छिपने की जगहों और अन्य आवश्यक निर्देश भेज रहा था।