PM मोदी ने पश्चिमी एशिया के संकट पर चिंता जताई, सुरक्षा प्राथमिकता
पश्चिमी एशिया में संकट की गंभीरता
नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी एशिया की स्थिति को गंभीर बताया है। लोकसभा में सोमवार को उन्होंने इस क्षेत्र में चल रहे संघर्षों और भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। मोदी ने कहा कि सरकार इस संकट के प्रति संवेदनशील और सतर्क है, और हर संभव सहायता के लिए तैयार है। उन्होंने ईरान-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर लंबे समय तक रहने की संभावना जताई और कहा कि हमें कोरोना संकट की तरह तैयार रहना होगा। इसके साथ ही, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वैकल्पिक उपायों की खोज कर रहा है।
आर्थिक और मानवीय चुनौतियाँ
पश्चिमी एशिया की स्थिति चिंताजनक है। पिछले कुछ हफ्तों में, विदेश मंत्री एस जयशंकर और हरदीप सिंह पुरी ने इस विषय पर सदन को आवश्यक जानकारी दी है। यह संकट अब तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है, जिससे देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए, दुनिया सभी पक्षों से इस संकट का शीघ्र समाधान करने की अपील कर रही है।
भारत की सुरक्षा प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियाँ खड़ी की हैं, जो आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। युद्ध प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं, और यह क्षेत्र कच्चे तेल और गैस की आवश्यकताओं का एक बड़ा स्रोत है।
भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
उन्होंने बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं, और वहां भारतीय क्रू मेंबर की संख्या भी अधिक है। इस कारण से भारत की चिंताएँ स्वाभाविक हैं। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से हर भारतीय को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पश्चिमी एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
सुरक्षा उपाय और शिक्षा
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रभावित देशों में भारत के मिशन लगातार भारतीयों की सहायता में जुटे हैं। सभी भारतीयों को हर संभव मदद दी जा रही है, और नियमित रूप से एडवाइजरी जारी की जा रही है। इसके अलावा, 24 घंटे कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन भी स्थापित की गई हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध के चलते 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जिनमें से 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र हैं। खाड़ी देशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए सीबीएसई ने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएँ रद्द कर दी हैं।
