सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भोपाल, 03 जनवरी (हि.स.)। बीमारी जब शरीर से पहले मन को तोड़ने लगे, जब इलाज का नाम सुनते ही जेब का हिसाब लगाया जाने लगे और जब अस्पताल किसी डरावनी जगह जैसे लगने लगें, तब समाज को केवल डॉक्टर नहीं, भरोसे की जरूरत होती है। आज देश के साथ मध्य प्रदेश में “आरोग्य भारती” ने पिछले वर्षों में यही भरोसा लौटाने का काम किया है।
निःशुल्क सेवाएँ, संवेदनशील व्यवहार और समग्र स्वास्थ्य दृष्टि के माध्यम से यह संगठन उन लाखों लोगों के लिए आशा बन गया है, जिन्हें कल तक धनाभाव में उचित स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह जाना पड़ता था। कहने का मतलब कि गरीब से आमजन तक ये स्वास्थ्य सेवाएं बना किसी भेदभाव के निशुल्क दी जा रही हैं, यह ऐसे समाज के लिए बहुत दुखद और प्रेरणा देने वाला है।
दरअसल, “आरोग्य भारती” कोई नया संगठन नहीं है, ये वर्ष 2002 से स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय एक वैचारिक आंदोलन है। इसका मूल मंत्र है; “रोग से पहले स्वास्थ्य”। यही कारण है कि संगठन इलाज के साथ-साथ जीवनशैली, आहार, योग, पर्यावरण और मानसिक संतुलन को भी स्वास्थ्य का अभिन्न अंग मानता है।
व्यवहारिक धरातल पर “आरोग्य भारती” का कार्यदर्शन
“आरोग्य भारती” का विश्वास है कि स्वास्थ्य सेवा मानवता, संवेदना और परंपराओं को समर्पित भारत में चिकित्सकों और दवाओं तक सीमित नहीं हो सकती। समाज को अपने स्वास्थ्य के प्रति कर्तव्य और उत्तरदायित्व का बोध कराना उतना ही आवश्यक है, जितना कि दैनन्दिन जीवन में जरूरी व्यवहार को सामान्यत: आवश्यक माना गया है। इसलिए इसी सोच को साथ ले संगठन आज सभी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों, सेवाभावी नागरिकों और स्वयंसेवकों को जोड़ते हुए देशभर में कार्य का विस्तार करते हुए अपना कार्य सफलता के साथ कर रहा है।
आज संगठन की सक्रिय इकाइयाँ देश के 43 प्रांतों और 900 से अधिक जिलों में कार्य कर रही हैं। मध्य प्रदेश में यह कार्य विशेष रूप से प्रभावी रूप में सामने आया है, जहाँ “आरोग्य भारती” के सेवा प्रकल्प समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़े हुए हैं।
आरोग्य मित्र : समाज के भीतर से निकला समाधान
स्वास्थ्य को समाज की जड़ों तक पहुँचाने के लिए “आरोग्य भारती” ने ‘आरोग्य मित्र’ की संकल्पना विकसित की। सामान्य शैक्षणिक योग्यता रखने वाले सेवाभावी युवक-युवतियों को प्राथमिक स्वास्थ्य, जीवनशैली, योग, आहार, घरेलू उपचार, प्राथमिक उपचार और सीपीआर जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। उल्लेखित है कि बीते 24 वर्षों में 375 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 9000 से अधिक स्वयंसेवक तैयार किए जा चुके हैं। यही आरोग्य मित्र आज गाँव-गाँव, बस्तियों और शहरी कॉलोनियों में स्वास्थ्य जागरूकता का कार्य कर रहे हैं।
भोपाल : सेवा का जीवंत मॉडल
देखने में आया है कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में “आरोग्य भारती” के सेवा कार्य मॉडल के रूप में सामने आए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर संगठन की गंभीरता का प्रमाण है निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम। वर्ष 2021 से निरंतर चल रहे 9 केंद्रों के माध्यम से अब तक 20 हजार से अधिक बच्चों को स्वर्ण प्राशन दिया जा चुका है। यह उन परिवारों के लिए वरदान है जो महँगी दवाइयाँ और सप्लीमेंट नहीं खरीद सकते। इसी तरह भोपाल के आसपास पांच गाँवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का परिणाम केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ के स्वास्थ्य आँकड़ों में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है। समय रहते रोगों की पहचान और जीवनशैली सुधार से लोगों की दवा-निर्भरता कम हुई है।
योग और जीवनशैली : दवा से पहले समाधान
भोपाल में 22 स्थानों पर नियमित निःशुल्क योग कक्षाएँ संचालित हो रही हैं। इनमें शामिल होने वाले अधिकांश लोग ऐसे हैं जो या तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या लंबे समय से दवाओं पर निर्भर रहे हैं। योग ने उन्हें शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी दिया है। साथ ही पांच विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्य बच्चों में स्वास्थ्य संस्कार विकसित कर रहा है। स्वच्छता, आहार, दिनचर्या और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देकर आरोग्य भारती भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने में जुटा है।
महिला टोली : दे रहीं घर-घर स्वास्थ्य की ताकत
इतना ही नहीं संपूर्ण मध्य प्रदेश में महिला टोली के माध्यम से घरेलू उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल महिलाओं को केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं बनाती, बल्कि उन्हें परिवार और समाज के लिए स्वास्थ्य की धुरी बनाती है। साधारण घरेलू उपायों से छोटे-मोटे रोगों का समाधान गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य का साझा सरोकार
“आरोग्य भारती” का मानना है कि प्रदूषित पर्यावरण में स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं। इसी सोच से प्रतिदिन कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लिया गया। अब तक 1697 पौधे लगाए जा चुके हैं और सभी जीवित हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है। यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य में निवेश जैसा है।
शिवपुरी की अनुकरणीय पहल ला रही रंग
“आरोग्य भारती” जिला इकाई शिवपुरी ने सेवा का एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया। शिवपुरी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में आर्थोपेडिक विभाग में एक इंडक्शन, मातृत्व एवं शिशु विभाग में दो इंडक्शन, लगवाकर रोगियों की सुविधा में स्थायी सुधार किया गया। यह दिखाता है कि आरोग्य भारती सेवा को केवल शिविरों तक सीमित नहीं रखता।
उत्सव से जागरूकता तक
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, धन्वंतरि जयंती और आयुर्वेद दिवस जैसे आयोजनों को आरोग्य भारती ने जन-जागरूकता के उत्सव में बदला है। एक ही वर्ष में लाखों लोगों की सहभागिता इस बात का प्रखर प्रमाण है कि समाज इस स्वास्थ्य के आन्दोलन और विचार से जुड़ रहा है।
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय कहते हैं, “आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सेवा संगठन है । जिसके माध्यम से देश में अनेक सेवा कार्य नित्यप्रति सम्पन्न हो रहे हैं। उनमें मध्य प्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आज संगठन कई प्रकल्प चला रहा है। यह कार्य निरंतर ठीक ढंग से चलता रहे इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है। आरोग्य भारती का प्रयास है कि मध्य प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक वनस्पति संपदाओं का उपयोग करते हुए रोगी तो स्वस्थ हो ही साथ में स्वस्थ व्यक्ति भी रोगी न बने।”
उन्होंने आगे बताया, “हमारा प्रयास रहता है कि वनवासी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित कर आरोग्य मित्र बना सकें । ताकि उनके माध्यम से लोगों की जीवन शैली में सुधार कर अधिकाधिक लोगों को स्वस्थ रख पाएं। साथ ही सर्व समावेशी चिकित्सा पद्धति का विकास हो, जिससे कि चिकित्सा पद्धति आधारित चिकित्सा न होकर रोगी आधारित चिकित्सा हो और रोगी जल्दी स्वस्थ हो सके, यह हमारी प्राथमिकता के साथ भविष्य का दृष्टिकोण है।”
उधर, इस संबंध में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख मिहिर कुमार कहते हैं कि “माई हेल्थ माई रिपॉन्सबिलिटी” की भावना जब समाज में जड़ पकड़ लेगी, तब स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। इसी सोच को लेकर आरोग्य भारती का गठन हुआ और अपने गठन से लेकर आज तक संगठन इसी उद्देश्य को लेकर प्रमुखता से चल रहा है, हमारे संगठन का कुल लक्ष्य यही है कि कोई भी चिकित्सा, पद्धति आधारित नहीं होनी चाहिए वह रोगी आधारित चिकित्सा विकसित होनी चाहिए, वास्तव में हम इसी लक्ष्य को लेकर आज आगे बढ़ रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी
