बिहार में 2030 तक 30 प्रतिशत ईवी का लक्ष्य, खरीद और चार्जिंग स्टेशन पर भारी अनुदान
पटना, 05 जून (हि.स.)। बिहार सरकार वाहन जनित प्रदूषण को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग को तेजी से प्रोत्साहित कर रही है। परिवहन विभाग की ओर से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के साथ-साथ चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वाले उद्यमियों और संस्थाओं को भी आकर्षक अनुदान और विभिन्न प्रकार की रियायतें दी जा रही हैं।
परिवहन विभाग का मानना है कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि पेट्रोल और डीजल की खपत में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज होगी। विभाग के आकलन के अनुसार यदि वर्ष 2030 तक राज्य के कुल वाहनों में 30 प्रतिशत वाहन बैटरी आधारित हो जाते हैं, तो प्रतिवर्ष लगभग 7.50 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत संभव होगी। इससे ऊर्जा संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक बचत और स्वच्छ पर्यावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
2030 तक ईवी आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की तैयारी
हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत वर्ष 2030 तक राज्य में पंजीकृत कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिवहन विभाग लगातार नई योजनाएं और प्रोत्साहन नीतियां लागू कर रहा है तथा भविष्य में और भी नई पहल किए जाने की संभावना है।
वाहन खरीद पर सब्सिडी और टैक्स में छूट
राज्य सरकार आम लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए आर्थिक सहायता भी दे रही है। ईवी खरीदने पर विभिन्न श्रेणियों में सब्सिडी के साथ कर में भी राहत दी जा रही है। सरकार की नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 50 प्रतिशत कर छूट का प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त 'मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना' के तहत महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत महिलाओं को ई-चारपहिया वाहन खरीदने पर एक लाख रुपये तक तथा ई-दोपहिया वाहन खरीदने पर 12 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ते हुए पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर विशेष जोर
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों, पेट्रोल पंपों, होटल-मोटलों, बस टर्मिनलों, व्यावसायिक परिसरों, पार्किंग स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति विश्वास बढ़ेगा और ईवी अपनाने की गति तेज होगी।
चार्जिंग स्टेशन लगाने पर मिलेगा आकर्षक अनुदान
राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वालों को विभिन्न श्रेणियों में वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
-एसी चार्जर (3 गन्स) मध्यम चार्जर के लिए पहले 900 चार्जरों पर उपकरण की खरीद लागत का 75 प्रतिशत अथवा अधिकतम 15 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।
-एसी चार्जर (2 गन्स) तेज चार्जर तथा डीसी चार्जर (2 गन्स) मध्यम चार्जर के लिए पहले 450 चार्जरों पर उपकरण लागत का 75 प्रतिशत अथवा अधिकतम 37,500 रुपये तक अनुदान मिलेगा।
-चाडेमो आधारित दो गन्स वाले तेज चार्जर के लिए पहले 90 चार्जरों पर लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त कुछ श्रेणियों में चार्जिंग स्टेशन स्थापना और उपकरणों की खरीद पर कुल मिलाकर 75 हजार रुपये से लेकर 2.25 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वच्छ पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
परिवहन विभाग का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, वायु गुणवत्ता बेहतर होगी और राज्य में स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित होगी। साथ ही पेट्रोल और डीजल की खपत कम होने से ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
बिहार सरकार को उम्मीद है कि अनुदान, कर छूट और मजबूत चार्जिंग नेटवर्क जैसी सुविधाओं के माध्यम से बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा और राज्य पर्यावरण संरक्षण तथा हरित परिवहन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी
