छत्तीसगढ़ का मंढीप खोल गुफा : रहस्य, आस्था और साल में एक दिन की अनोखी यात्रा
रायपुर 29 अप्रैल (हि.स.) । छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले कें घने जंगलों और पहाडिय़ों के बीच छिपी हुई मंढीप खोल गुफा सिर्फ एक गुफा नहीं, बल्कि आस्था और रहस्य का एक ऐसा संगम है जो साल में केवल एक दिन जीवंत हो उठता है। यह गुफा अक्षय तृतीया के बाद सोमवार को भक्तों के लिए खोला गया।
गुफा के अंदर स्थित भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए 27 अप्रैल 2026 को करीब 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। भगवान भोलेनाथ के श्रद्धालु करीब 9 किमी दुर्गम रास्ते, घने जंगल और 16 छोटी-छोटी नदियों को पार कर पहुंचे। जहां सुरक्षा की दृष्टि से हर एक किमी की दूरी पर पुलिस बल तैनात रहे।
उल्लेखनीय है कि यह गुफ जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी की दूरी पर है। 27 अप्रैल को सुबह 4 बजे से शाम 6 बजे तक तक श्रद्धालुओं को दर्शन करवाया गया। शिवलिंग गुफा के 500 मीटर अंदर है। चट्टान हटाने से जंगली जानवरों से बचाव के लिए पहले हवाई फायर किया गया।
गुफा में पहला प्रवेश ठाकुरटोला के जमींदार परिवार के लोगों ने ही किया। वहां स्थित शिवलिंग सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि विधान से पूजा अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
मंढीप खोल गुफा के सदस्य गुणीराम यादव ने चर्चा में बताया कि गुफा के अंदर कई रहस्य छिपे हुए हैं। अंदर चमकीले पत्थर हैं। अजगर गुफा, चमगादड़ गुफा और श्वेत गंगा भी है। गुफा का रहस्य अभी भी नहीं सुलझा है। गुफा के अंदर ऐसे कई रास्ते हैं जो आज तक इस गुफा की छोर नहीं मिली है। इसलिए लोग एक दिन इस गुफा के दर्शन करने के लिए हजारों की भीड़ में आते हैं। लेकिन सभी लोगों को शाम होने से पहले ही बाहर आना होता है।
मंढीप खोल गुफा के दर्शन करने पहुंचे दुर्ग जिले के श्रद्धालु रीतिक टंडन एवं खैरागढ़ के अमलीडीह निवासी खुमान सिंह बर्मन ने बताया कि तपती गर्मी में कठिन यात्रा कर जैसे ही गुफा के अंदर प्रवेश किया ताे ठंडी लगने लगती है। चट्टानों से टपकती पानी की बूंदें, चमकते पत्थर और गुफा के भीतर की रहस्यमयी शांति सब कुछ किसी दूसरी दुनिया का एहसास कराते हैं।
मंढीप खोल गुफा नदी-नालाें और घने जंगलाें के खूबसूरत हिस्से में स्थित है। यहां पहुंचना सरल नहीं है, क्योंकि गुफा तक पहुंचने का कोई स्थाई रास्ता नहीं है। पैलीमेटा या ठाकुरटोला तक ही सड़क मार्ग मौजूद है। इसके बाद भक्तों को घोर जंगल से होते हुए पगडंडियों, नदी और नालों को भी पार करना पड़ता है। गुफा के पास स्थित कुंड से निकलने वाली श्वेत गंगा को श्रद्धालु रास्ते में 16 बार पार करते हैं।
उल्लेखनीय है कि, हर साल अक्षय तृतीया के बाद पडऩे वाले सोमवार को इस गुफा का द्वार श्रद्धालुओं के लिए महज एक दिन के लिए खोला जाता है। हजारों की संख्या में भोलेनाथ के भक्त इस दिन भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जिनकी संख्या साल दर साल बढ़ती ही जा रही है।मंढीप खोल गुफा हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति और आस्था के कुछ रहस्य ऐसे होते हैं, जिन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है—पूरी तरह समझा नहीं जा सकता।
हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल
