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दस्तूर से टाटा बनने तक, एक उपनाम से खड़ा हुआ विश्वविख्यात उद्योग साम्राज्य

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दस्तूर से टाटा बनने तक, एक उपनाम से खड़ा हुआ विश्वविख्यात उद्योग साम्राज्य


दस्तूर से टाटा बनने तक, एक उपनाम से खड़ा हुआ विश्वविख्यात उद्योग साम्राज्य


पूर्वी सिंहभूम, 01 मार्च (हि.स.)। झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में जमशेदजी नसरवानजी टाटा की जयंती को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। हर वर्ष 3 मार्च को मनाए जाने वाले संस्थापक दिवस के अवसर पर पूरी लौहनगरी दुल्हन की तरह सजाई जाती है। शहर की पहचान मानी जाने वाली टाटा स्टील इस दिन को विशेष रूप से भव्य रूप में मनाती है।

3 मार्च के अवसर पर साकची स्थित जुबली पार्क को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया जाता है। पूरे शहर में रोशनी की ऐसी छटा बिखरती है कि जमशेदपुर मानो प्रकाश से नहा उठता है। इस आयोजन की तैयारी लगभग 10 से 15 दिन पहले से शुरू कर दी जाती है, जिसमें शहर के पार्कों और प्रमुख स्थलों को विशेष रूप से सजाया-संवारा जाता है।

भारतीय उद्योग जगत में जब भरोसे, गुणवत्ता और सामाजिक उत्तरदायित्व की चर्चा होती है, तब टाटा समूह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लगभग 118 वर्षों से अधिक समय से यह समूह इस्पात, मोटर वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी, चाय, नमक और आतिथ्य सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आज टाटा समूह 150 से अधिक देशों में कारोबार कर रहा है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस औद्योगिक विरासत की नींव वर्ष 1907 में रखी गई, जब दूरदर्शी उद्योगपति जमशेदजी टाटा ने भारत में आधुनिक इस्पात उद्योग स्थापित करने का साहसिक निर्णय लिया। उस समय देश में भारी उद्योगों की कल्पना भी कठिन मानी जाती थी, लेकिन सीमित संसाधनों और लगभग 21 हजार रुपये की प्रारंभिक पूंजी से शुरू हुई यह यात्रा आगे चलकर वैश्विक पहचान बन गई। उनका उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के अवसर सृजित करना था।

जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता नसरवानजी टाटा पारसी पुजारी वर्ग से जुड़े ‘दस्तूर’ परिवार के सदस्य थे। पारसी समुदाय के पूर्वज ईरान से भारत आकर गुजरात के संजान और बाद में नवसारी में बसे। प्रारंभ में परिवार का उपनाम ‘दस्तूर’ था, जो समय के साथ ‘टाटा’ के रूप में प्रचलित हो गया और आगे चलकर विश्वविख्यात पहचान बन गया।

जमशेदजी टाटा ने केवल उद्योग ही नहीं बसाया, बल्कि एक आदर्श औद्योगिक नगर का सपना भी देखा। इसी दूरदृष्टि का परिणाम है जमशेदपुर, जिसे आज देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। टाटा स्टील ने न केवल इस्पात उत्पादन में भारत को मजबूती दी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

हर वर्ष 3 मार्च को संस्थापक दिवस पर हजारों लोग शहर की भव्य सजावट और रोशनी का आनंद लेने पहुंचते हैं। प्रकृति प्रेमी जमशेदजी टाटा ने अपने सपनों के शहर को हरियाली और सुव्यवस्थित विकास के साथ बसाने की योजना बनाई थी, जिसके कारण जमशेदपुर आज देश के सबसे स्वच्छ और व्यवस्थित औद्योगिक नगरों में शामिल है।

आज ‘टाटा’ नाम केवल एक औद्योगिक समूह नहीं, बल्कि विश्वास, गुणवत्ता और राष्ट्र निर्माण का प्रतीक बन चुका है। ‘दस्तूर’ परिवार से शुरू होकर ‘टाटा’ नाम तक पहुंची यह यात्रा संघर्ष, दूरदर्शिता और समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक