मप्र के कबीरा ब्रांड ने खादी को बनाया लोकप्रिय, परंपरा और आधुनिकता का बन रहा प्रतीक
भोपाल, 13 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का ‘कबीरा’ ब्रांड अब परिधानों के साथ होम फर्निशिंग उत्पादों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खादी परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और रिश्तों की भावना को जोड़ते हुए ग्रामीण कारीगरों को रोजगार देने का माध्यम बन रही है।
प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने बुधवार को बताया कि म.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड ने खादी बंधन रिश्तों का थीम के साथ कबीरा ब्रांड को परंपरा और आधुनिकता का संगम बनाया है। फरवरी 2015 में शुरू हुए कबीरा ब्रांड में खादी का दायरा अब केवल वस्त्रों तक सीमित नहीं है, परिधान से लेकर घरेलू साज-सज्जा तक की पूरी रेंज अब ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। कबीरा रेंज में कॉटन साड़ियां, मुलबरी सिल्क साड़ियां, लेडीज-जेंट्स जैकेट, कुर्ती, सूट, शॉल, कुर्ता, शर्ट्स, तौलिया, बेडशीट, तकिया कवर, दरी, ऊनी कंबल और कॉटन, मलमल, सिल्क रनिंग ड्रेस मटेरियल शामिल हैं।
राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि खादी उन चुनिंदा बहुमुखी वस्त्रों में से है जो जैविक एवं पर्यावरण-मित्र होने के साथ विशेष भावना भी जागृत करती है। खादी भाई-बहन के शाश्वत प्रेम का प्रतीक भी है। प्रेम और संबंधों के त्योहारों, विशेषकर रक्षाबंधन जैसे पर्वों पर खादी का प्रयोग हमारे सांस्कृतिक गौरव का परिचायक है। यही कारण है कि खादी का बंधन अटूट है और यह हमेशा रिश्तों को जोड़ता है। रक्षाबंधन पर खादी राखियों और उपहारों की मांग हर वर्ष बढ़ रही है।
परिधान और होम फर्निशिंग में खादी की धूम
राज्यमंत्री जायसवाल ने बताया कि अत्याधुनिक डिजाइनों के कारण परिधान और होम फर्निशिंग में खादी की धूम है। कबीरा रेंज में 20 से ज्यादा उत्पादों के साथ खादी गर्मी में ठंडा और सर्दी में गर्म अहसास देने वाला वातानुकूलित वस्त्र भी है। इसी वजह से यह दैनिक जीवन, उत्सवों और औपचारिक अवसरों के लिए आदर्श बन गई है। जायसवाल ने कहा कि स्थानीय से वैश्विक मंत्र के साथ कबीरा खादी और विंध्या वैली ब्रांड ग्रामीण कारीगरों को रोजगार दे रहे हैं और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य को पूरा कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत
