कानपुर में क्रांतिकारियों की शरणस्थली पर बना था सिद्धि विनायक मंदिर

कानपुर, 28 अगस्त (हि.स.)। गणेश चतुर्थी से देशभर में गणपति उत्सव की शुरुआत हो चुकी है और लोग भक्ति में लीन हो गये। जगह—जगह पर पर पांडाल सजे हुए हैं और गणपति बप्पा मोरया से आसमान गुंजायमान हो रहा है। ऐसे में कानपुर के सिद्धि विनायक मंदिर की बात करना लाजिमी है, क्योंकि जिस उद्देश्य से मराठा जननायक बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव मनाने की परंपरा डाली थी यानी अंग्रेजों के खिलाफ जन आवाज। उसका आगाज कानपुर में भी हुआ था और एक छोटी सी जगह पर क्रांतिकारी एकत्र होकर योजना बनाते थे। इस योजना की जानकारी जब अंग्रेजों को पता चली तो उस जगह को सिद्धि विनायक मंदिर की शक्ल दे दी गई और बाल गंगाधर तिलक ने खुद भूमि पूजन किया था। यह मंदिर कानपुर के घंटाघर के समीप है जो इन दिनों चार मंजिला इमारत के रुप में है।
यूं तो देश भर में गणपति बप्पा के बहुत से मंदिर हैं। जिनका अपना एक अलग ही इतिहास है लेकिन क्या आप जानते हैं? कि औद्योगिक नगरी कानपुर के घंटाघर चौराहे पर भी एक विशालकाय गणेश मंदिर स्थापित है। जिसे श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। चार मंजिला यह मंदिर बेहद ही आकर्षक और सुंदर है। मंदिर के बाहर से ही दर्शन करने भर से भगवान गणेश जी की 14 फुट लंबी मूर्ति भक्तों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। यही नहीं इस मंदिर में भगवान गणेश जी की 10 मुखी मूर्ति भी स्थापित है। जिसे दशमुख गणेश भी कहा जाता है।
मंदिर के वरिष्ठ सेवादार विशाल शुक्ला बताते हैं कि यह मंदिर करीब 108 साल प्राचीन है। जिस जगह यह मंदिर स्थापित है। कभी यहां पर एक मकान हुआ करता था। जिसमें क्रांतिकारी बैठकें किया करते थे। रोज-रोज की भीड़ को देखकर अंग्रेजों को क्रांतिकारियों पर शक हुआ कि यहां पर कुछ लोग अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ रणनीति बनाते हैं। इससे बचने के लिए बाल गंगाधर तिलक ने उस भवन में भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित करवा दी। जिससे ब्रिटिश सरकार को यह लगे कि यह एक मंदिर है और लोग यहां पर भगवान के दर्शन करने आते हैं।
धीरे-धीरे समय बीतता गया और इस मंदिर का कायाकल्प होता गया। वर्तमान में यह मंदिर चार मंजिल का हो चुका है। इस मंदिर की सबसे विशेष बात यह है कि मंदिर की सामने वाली दीवार पर भगवान गणेश जी की करीब 14 फीट लंबी मूर्ति स्थापित है। जो देखने में बेहद ही आकर्षक है। इसके अलावा मंदिर की पहली मंजिल पर अष्टविनायक स्वरूप वाले गणेश जी विराजमान है। जबकि दूसरे माले पर भगवान गणेश जी की 10 मुख वाली मूर्ति स्थापित है। जिसे देशमुख गणेश के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा तीसरे वाले पर नवग्रह की वेदियां भी बनाई गईं हैं। जबकि चौथे माले पर मां गंगा विराजमान हैं।
वही मंदिर के सेवादार बबलू जायसवाल ने बताया कि इस मंदिर में पूरे साल भक्तों का ताता लगा रहता है लेकिन गणेश चतुर्थी आते ही भक्तों की भीड़ में कई गुना इजाफा देखने को मिलता है। मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि जो भी श्रद्धालु अपने घर या पंडाल में भगवान गणेश जी को स्थापित करता है। वह इन दिनों में गणेश मंदिर आकर एक बार माथा जरूर टेकता है।
आगे उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिनों में इस मंदिर में एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। जिनमें कवि सम्मेलन, गोष्टी और भजन संध्या जैसे कार्यक्रम रोजाना आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा बुधवार के दिन मंदिर में विशेष तौर पर भक्तों की भारी भीड़ दिखाई देती है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप