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बंगाल सरकार के 19 दिन - दबंगई, अवैध वसूली और धांधली के आरोपों में आला पुलिस अधिकारी सहित टीएमसी के कई नेता पहुंचाये गये सलाखों के पीछे

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बंगाल सरकार के 19 दिन - दबंगई, अवैध वसूली और धांधली के आरोपों में आला पुलिस अधिकारी सहित टीएमसी के कई नेता पहुंचाये गये सलाखों के पीछे


बंगाल सरकार के 19 दिन - दबंगई, अवैध वसूली और धांधली के आरोपों में आला पुलिस अधिकारी सहित टीएमसी के कई नेता पहुंचाये गये सलाखों के पीछे


कोलकाता, 28 मई (हि.स.)।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व सत्ताधारी दल तृणमूल के नेताओं, मंत्रियों, पार्षदों और करीबी अधिकारियों पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। गलत नौ मई को शपथ लेने वाली शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के 19 दिन पूरे हो चुके हैं और इस दौरान करीब दो दर्जन नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। राज्य के अलग-अलग जिलों में भ्रष्टाचार, तोलाबाजी, वित्तीय गड़बड़ी, चुनाव बाद हिंसा और अवैध वसूली जैसे मामलों में एक के बाद एक गिरफ्तारियां हो रही हैं। पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के चलते कई प्रभावशाली नेताओं को जेल जाना पड़ा है।

सबसे चर्चित गिरफ्तारी पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बोस की मानी जा रही है। नगरनिगम नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में दक्षिण दमदम नगरपालिका में अवैध नियुक्तियों की सिफारिश करने के आरोप में उन्हें 11 मई को ईडी ने गिरफ्तार किया था। विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्हें कई बार पूछताछ के लिए तलब किया गया था।

वहीं, विष्णुपुर के तृणमूल विधायक दिलीप मंडल के खिलाफ विरोधियों को धमकाने और हिंसा भड़काने के आरोप में कई शिकायतें दर्ज हुई थीं। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन आखिरकार 27 मई को पुलिस ने उन्हें ओडिशा के पुरी स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष कार्य बल और डायमंड हार्बर पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। इससे पहले उनके बेटे अर्घ्य मंडल को भी हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था।

पूर्व पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम भी कई वित्तीय अनियमितताओं और कथित कारोबारी गठजोड़ में सामने आया है। ईडी को आशंका थी कि वह विदेश भाग सकते हैं, जिसके बाद उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया। कोलकाता और दिल्ली में दर्ज कई मामलों में उनका नाम जुड़ा है। फर्न रोड स्थित आवास पर छापेमारी के बाद से वह फरार बताए जा रहे थे। वे ममता बनर्जी के खास अधिकारियों में शुमार किए जाते थे। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।.

उत्तर 24 परगना के बादुड़िया नगरपालिका के चेयरमैन दीपंकर भट्टाचार्य को भी भ्रष्टाचार और राहत सामग्री में गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके पाट के खेत में छापेमारी के दौरान मिट्टी के नीचे छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में नकदी बरामद की। जांच एजेंसियों के अनुसार करीब दो करोड़ 24 लाख रुपये नकद चार ट्रॉली और एक बोरे से बरामद किए गए। अदालत ने उन्हें छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

कोलकाता के बेहाला इलाके के प्रभावशाली तृणमूल नेता और कोलकाता नगर निगम के 123 नंबर वार्ड के पार्षद सुदीप पोल्ले को भी तोलाबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। छात्र राजनीति से उभरकर तृणमूल में तेजी से प्रभाव बढ़ाने वाले सुदीप को इलाके में दबंग नेता माना जाता था।

इसी तरह बिधाननगर नगर निगम के चार तृणमूल पार्षदों पर भी पुलिस ने कार्रवाई की है। सम्राट बरुआ उर्फ राखाल को डराने-धमकाने और अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पूर्व मंत्री सुजीत बोस के करीबी माने जाने वाले रंजन पोद्दार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। वहीं, सुशोभन मंडल उर्फ माइकल पर एक दुकानदार से पांच लाख रुपये की वसूली मांगने का आरोप है। समरेश चक्रवर्ती पर भी प्रमोटर से 50 लाख रुपये मांगने का मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी हुई।

कूचबिहार में तृणमूल युवा नेता स्वपन बर्मन को भी गिरफ्तार किया गया है। उन पर वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले और पूर्व विधायक की गाड़ी में तोड़फोड़ का आरोप है। पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से पिस्तौल और एक राउंड गोली भी बरामद की।

संदेशखाली मामले में शाहजहां शेख के करीबी माने जाने वाले अब्दुल कादेर मोल्ला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर भाजपा समर्थकों और अपनी ही पार्टी के विधायक के वाहन पर हमला करने के आरोप हैं।

हुगली जिले के डानकुनी से तृणमूल पार्षद सूर्य दे की गिरफ्तारी भी चर्चा में रही। उन पर एक व्यक्ति की पिटाई करने का आरोप है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले चुनाव आयोग की मतदाता सूची में उनका नाम गलती से मृत घोषित कर दिया गया था, जिसके विरोध में वह समर्थकों के साथ श्मशान घाट पहुंच गए थे। बाद में उनका नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़ा गया।

इसके अलावा विभिन्न जिलों में तृणमूल कांग्रेस के पंचायत एवं जिला स्तर के कई नेता भी विभिन्न आरोपों के तहत गिरफ्तार किये जा चुके हैं। इस दिशा में राज्य प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

राज्य में लगातार हो रही इन गिरफ्तारियों को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया हुआ है। भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर