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बिजनौर में बेटियों को सम्मान बना गांव की पहचान,' गांव की गरिमा' सामाजिक जागरूकता अभियान का दिख रहा असर

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बिजनौर में बेटियों को सम्मान बना गांव की पहचान,' गांव की गरिमा' सामाजिक जागरूकता अभियान का दिख रहा असर


बिजनौर में बेटियों को सम्मान बना गांव की पहचान,' गांव की गरिमा' सामाजिक जागरूकता अभियान का दिख रहा असर


बिजनौर में बेटियों को सम्मान बना गांव की पहचान,' गांव की गरिमा' सामाजिक जागरूकता अभियान का दिख रहा असर


बिजनौर में बेटियों को सम्मान बना गांव की पहचान,' गांव की गरिमा' सामाजिक जागरूकता अभियान का दिख रहा असर


बिजनौर, 22 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में जिला विकास अधिकारी ( डीडीओ) रचना गुप्ता के मार्गदर्शन में बेटियों को सम्मान मिलने की अनूठी पहल ग्रामीण क्षेत्र में दिखाई दे रही है | जब कोई सोच समाज की दिशा बदलने का संकल्प लेकर आगे बढ़ती है, तब वह केवल योजना नहीं बल्कि एक जनजागरण अभियान बन जाती है।

ऐसा ही एक प्रेरणादायी कार्य “गांव की गरिमा” के नाम से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। यह अभियान बेटियों को सम्मान देने, शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गांव की प्रतिभाओं को समाज के सामने लाने का अनूठा प्रयास बन चुका है। इस अभिनव पहल की शुरुआत लगभग ढाई वर्ष पहले जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता ने अपनी हरदोई पोस्टिंग के दौरान की थी। अभियान के अंतर्गत गांव की उन बेटियों के सम्मान में विशेष बोर्ड लगाए गए, जिन्होंने सरकारी सेवाओं में अपनी पहचान बनाई। इतना ही नहीं, उनके गांवों में मार्गों का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया, जिससे गांव की बेटियां प्रेरणा का प्रतीक बन सकें।

“गांव की गरिमा” नाम से चल रहे इस अभियान का उद्देश्य केवल सम्मान देना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना है कि बेटियां किसी भी गांव, परिवार और समाज की असली पहचान होती हैं। गांवों में लगाए गए ये बोर्ड अब नई सोच, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक बन चुके हैं।

आज जनपद बिजनौर के ग्रामीण क्षेत्रों में यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। गांव-गांव में “गांव की गरिमा” बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिससे बेटियों को सम्मान के साथ नई पहचान मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इन बोर्डों को देखकर गांव के बच्चों और युवाओं में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ रहा है और बेटियों को आगे पढ़ाने की सोच मजबूत हो रही है।

जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता का कहना है कि यह केवल सम्मान का कार्य नहीं, बल्कि एक जागरूकता संदेश है। यह अभियान उन परिवारों और समाज को प्रेरित करता है जो बेटियों की शिक्षा को महत्व देते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। आज “गांव की गरिमा” केवल एक नाम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, महिला सम्मान और सामाजिक बदलाव की नई पहचान बन चुका है। इस सराहनीय कार्य को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने रचना गुप्ता को सम्मानित भी किया था। उन्होंने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा था कि ऐसे प्रयास गांवों में सामाजिक चेतना जगाने का कार्य करते हैं और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / नरेन्द्र