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उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से बदली ममता गुप्ता की जिंदगी, बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

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उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से बदली ममता गुप्ता की जिंदगी, बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा


उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से बदली ममता गुप्ता की जिंदगी, बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा


वाराणसी, 01 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। मिशन से जुड़कर अनेक महिलाओं ने न केवल अपनी आजीविका को सशक्त बनाया है, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी वाराणसी जनपद के हरहुआ विकासखंड स्थित बहोरिपुर गांव की निवासी ममता गुप्ता की है।

ममता गुप्ता, पत्नी मुरारीलाल गुप्ता, अपने तीन बच्चों सहित पांच सदस्यीय परिवार का पालन-पोषण करती हैं। इंटरमीडिएट शिक्षित ममता समूह से जुड़ने से पहले गृहिणी थीं और घरेलू कार्यों के साथ अपने पति की सहायता करती थीं। उनके पति मूंगफली आदि का ठेला लगाकर किसी तरह परिवार का खर्च चलाते थे।

वर्ष 2019 में ममता ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ‘माँ लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह’ की सदस्यता ग्रहण की। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी विभिन्न आवश्यकताओं के लिए ऋण प्राप्त किया। इसी ऋण की सहायता से उन्होंने अपने मकान की मरम्मत कराई तथा घर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की।

समूह से मिले बड़े ऋण और पति के सहयोग से ममता ने केक एवं बेकरी उत्पादों की दुकान शुरू की। क्षेत्र में बेकरी उत्पादों की अच्छी मांग होने के कारण उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ा। वर्तमान में इस दुकान से परिवार को औसतन 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। दुकान का संचालन मुख्य रूप से उनके पति करते हैं, जबकि समय मिलने पर ममता भी इसमें सहयोग करती हैं।

आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाने के लिए ममता ने अपने संकुल स्तरीय फेडरेशन के माध्यम से रोजगार का एक और अवसर प्राप्त किया। उनका चयन बैंक सखी के रूप में हुआ। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की वीरापट्टी शाखा में अपनी सेवाएं दे रही हैं। बैंक सखी के रूप में वह स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण ग्राहकों को खाता खोलने, जमा-निकासी, पेंशन, बीमा एवं अन्य बैंकिंग सेवाओं में सहयोग प्रदान करती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 5 से 6 हजार रुपये अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।

आज ममता गुप्ता अपने गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि मेहनत, लगन और सही अवसर मिलने पर कोई भी महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती है। वह अन्य महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने तथा बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित करती हैं।

ममता कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह ने उन्हें आत्मनिर्भरता और समृद्धि का रास्ता दिखाया है। उनके बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और पूरा परिवार आर्थिक रूप से पहले से अधिक सशक्त हुआ है। वह चाहती हैं कि उनकी तरह अन्य महिलाएं भी मिशन से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदार बनें।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी