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मकर संक्रांति से पहले वाराणसी में पतंग कारोबार ने पकड़ी रफ्तार, कारीगरों में दिखा उत्साह

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मकर संक्रांति से पहले वाराणसी में पतंग कारोबार ने पकड़ी रफ्तार, कारीगरों में दिखा उत्साह


मकर संक्रांति से पहले वाराणसी में पतंग कारोबार ने पकड़ी रफ्तार, कारीगरों में दिखा उत्साह


—पतंगबाजी के शौकीन युवा और बच्चे पर्व को लेकर उत्साहित,आसमान में उड़ने लगी रंग—बिरंगी पतंगे

वाराणसी,6 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में मकर संक्रांति पर्व में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले ही शहर में पतंगबाजी का रंग चढ़ने लगा है। युवाओं और बच्चों में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ने लगी हैं, वहीं शहर के विभिन्न इलाकों में पतंग बनाने और बेचने का कारोबार भी तेज हो गया है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी देश के अलग–अलग हिस्सों से पतंग बनाने वाले कारीगर वाराणसी पहुंच रहे हैं। कोलकाता से आए पतंग कारीगर नौशाद अली पिछले कई वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले हैं और वहीं साल भर पतंग बनाते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के अवसर पर वाराणसी का बाजार बेहतर होने के कारण यहां काम करना अधिक फायदेमंद रहता है। नौशाद अली के अनुसार पतंग बनाने में कागज, गोंद, कमानी और चादर का उपयोग होता है।

कागज दिल्ली से मंगाया जाता है, कमानी कानपुर से आती है, जबकि अन्य सामग्री तुलसीपुर और कभी-कभी कोलकाता से मंगाई जाती है। एक अनुभवी कारीगर अपनी दक्षता के अनुसार प्रतिदिन 800 से 1200 तक पतंगें बना लेता है। बाजार में छोटी से लेकर बड़ी साइज की पतंगें उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत एक रुपये से लेकर दस रुपये तक होती है। हालांकि बढ़ती महंगाई ने इस पारंपरिक कारोबार को प्रभावित किया है।

नौशाद का कहना है कि महंगाई के चलते लोग पतंगबाजी पर खर्च कम कर रहे हैं, जिससे कारीगरों की आमदनी घट रही है। उन्होंने सरकार से पतंग कारीगरों की समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की। उन्होंने खतरनाक और प्रतिबंधित चाइनीज मांझे को भी कारोबार के लिए बड़ा खतरा बताया। नौशाद के अनुसार चाइनीज मांझा जानलेवा साबित हो रहा है और इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसका असर पतंग कारोबार पर भी पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कारीगर अपनी पतंगों में केवल साधारण धागे का ही इस्तेमाल करते हैं।

नौशाद अली ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो कारीगरों और उनके परिवारों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही उन्होंने मकर संक्रांति से पहले पतंग बाजार में अपेक्षित रौनक न दिखने पर भी चिंता व्यक्त की।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी