गर्मी के दिनों में बेल के रस का विशेष महत्व, शुगर रोगियों के लिए लाभकारी
वाराणसी, 23 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की श्री काशी विश्वनाथ नगरी वाराणसी में जहां एक ओर बाबा के शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया जाता है तो वहीं गर्मी के दिनों में बेल के रस का विशेष महत्व होता है। बेल रस तपिश, लू, गर्मी से शरीर को बचाया जाता है। वैद्य और चिकित्सक भी बेल के रस को पीने पर जोर देते हैं। इन दिनों काशी में बेल का शरबत बेचने वालों की दुकानों में ग्राहकों की रौनक खूब देखने को मिल रही है।
बेल का रस पीने को लेकर होम्योपैथी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर अम्बरीष राय ने शनिवार को कहा कि बेल के अंदर गुदे को निकाल कर उससे ही रस बनाया जाता है। बेल में कब्ज, गैस और एसिडिटी से राहत दिलाने के गुण होते हैं। बेल की तासीर ठंडी होने से शरीर के तापमान नियंत्रित रखने में मददगार होता है। डायरिया और दस्त से भी बेल रस राहत देता है। बेल में मौजूद टैनिन और पेक्टिन दस्त को रोकने में अचूक औषधि का काम करता है।
डॉ राय ने कहा कि ब्लड शुगर के रोगियों के लिए बेल रस उपयोगी और लाभकारी है। बेल रस के नियमित सेवन से शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इम्युनिटी को बढ़ता है और इसमें विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है।
वाराणसी के पुलिस लाइन क्षेत्र में बेल के रस की दुकान लगाने वाले दुकानदार अमित की मानें तो गर्मियों में ही बेल के रस की मांग रहती है। बेल का रस का छोटा गिलास 20 और बड़ा गिलास 40 के रेट में बेचते हैं। प्रतिदिन 60 से 80 गिलास तक में वह बेच पाते हैं। बेल का रस पीने वालों में ज्यादातर लोग पैदल यात्री और दोपहिया वाहन सवार होते हैं, जो गर्मी से राहत के लिए बेल का रस पीते हैं।
पहाड़िया मंडी में बेल के होलसेल का काम करने वाले पप्पू ने बताया कि बेल का व्यापार बहुत बड़े पैमाने पर नहीं होता। गांव में बगीचों से निकल कर बेल का फल मंडी तक आता है। जहां बेल की बिक्री होती है और शरबत का ठेला और दुकानें लगाने वाले इसे ले जाते हैं। गर्मी में इनकी डिमांड काफी अधिक रहती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद
