केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जज हटाने की अपील पर रखा अपना पक्ष
दिल्ली हाई कोर्ट में जज हटाने की अपील
दिल्ली की आबकारी नीति से संबंधित मामले में, अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में जज स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग की। आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अदालत में अपने तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि जज स्वर्ण कांता शर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक संगठन, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में चार बार भाग लिया, जिससे संदेह उत्पन्न होता है। उन्होंने इस मामले में जज को हटाने के लिए नौ कारण बताए।
केजरीवाल का तर्क
केजरीवाल ने अदालत में कहा कि 9 मार्च को पहली सुनवाई के दौरान केवल सीबीआई ही मौजूद थी, फिर भी अदालत ने आदेश पारित कर दिया। उन्होंने कहा, 'ट्रायल कोर्ट ने 3 नवंबर से फरवरी तक दैनिक आधार पर सुनवाई की और आदेश पारित किया, लेकिन इस अदालत ने उसे 5 मिनट में गलत ठहरा दिया। जब यह आदेश आया, तो मुझे संदेह हुआ कि क्या अदालत पक्षपाती है और क्या मुझे यहां न्याय मिलेगा।' इसीलिए, उन्होंने चीफ जस्टिस को लिखा कि उनका मामला किसी अन्य बेंच को ट्रांसफर किया जाए।
जज हटाने के तर्क
केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जज का पक्षपाती होना आवश्यक नहीं है, लेकिन यदि किसी पार्टी के मन में उचित संदेह है, तो रेक्यूजल का मामला बनता है। उन्होंने कहा, 'मेरे मन में संदेह है, और मेरी आपत्ति इस रेक्यूजल एप्लीकेशन के माध्यम से अदालत और पार्टी के बीच है। सीबीआई का इससे कोई संबंध नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि उनके मामले में पांच अन्य केस पहले ही आ चुके हैं।
अवैध गिरफ्तारी का मामला
केजरीवाल ने कहा कि उनका मामला अवैध गिरफ्तारी से संबंधित है और अदालत को यह तय करना था कि जांच अधिकारी के पास पर्याप्त कारण हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने केवल दो सुनवाई में ही निर्णय दे दिया। यहां वे जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के उस फैसले का उल्लेख कर रहे थे, जिसमें उनकी गिरफ्तारी को सही ठहराया गया था।
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