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शशि थरूर ने मिडिल ईस्ट संकट पर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में अंतर बताया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मिडिल ईस्ट संकट पर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में स्पष्ट भिन्नता को उजागर किया। उन्होंने नई दिल्ली की नीति का समर्थन करते हुए इस्लामाबाद पर कटाक्ष किया। थरूर ने पाकिस्तान की स्थिति और युद्ध के संभावित प्रभावों पर भी चर्चा की। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना का जवाब देते हुए भारत की जिम्मेदारी पर जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर थरूर के विचार और पाकिस्तान की भूमिका के बारे में।
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शशि थरूर ने मिडिल ईस्ट संकट पर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में अंतर बताया

भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में अंतर

कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने आज मिडिल ईस्ट संकट पर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में स्पष्ट भिन्नता को उजागर किया। उन्होंने नई दिल्ली की नीति का समर्थन करते हुए इस्लामाबाद पर कटाक्ष किया। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता कर रहे हैं।


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट में एक अजीब बात सामने आई, जिसमें लिखा था - 'Draft - Pakistan's PM Message on X'। थरूर ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, 'क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान का वॉशिंगटन के साथ क्या संबंध है? यह आरोप लगाया जा रहा है कि अमेरिका ने शरीफ के लिए यह ट्वीट तैयार किया था। अगर हम भारत के प्रधानमंत्री के लिए कुछ लिखें, तो क्या हम उसमें 'Draft for India's PM' लिखेंगे?'


उन्होंने यह भी कहा कि शरीफ का पोस्ट कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट के समान था। थरूर ने मजाक में कहा, 'केवल पाकिस्तान ही वाशिंगटन के साथ ऐसा रोल निभा सकता है।'


पाकिस्तान की स्थिति

थरूर ने आगे कहा कि पाकिस्तान की ईरान के साथ 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जहां बड़ी संख्या में शिया समुदाय है। यदि युद्ध बढ़ता है, तो सबसे पहले शरणार्थी पाकिस्तान में आएंगे। इसलिए पाकिस्तान का इस स्थिति में दांव अलग है। उन्होंने कहा, 'हमारे हित इस प्रक्रिया में नहीं, बल्कि इसके परिणाम में हैं। इसमें कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।'


भारत के संदर्भ में, उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में एक करोड़ से अधिक भारतीय निवास करते हैं। इस युद्ध का ऊर्जा आपूर्ति (तेल-गैस) पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, 'शांति होनी चाहिए। यह युद्ध भारत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। चाहे पाकिस्तान मध्यस्थता करे या कोई और, युद्ध का समाप्त होना भारत के हित में है।'


थरूर ने यह भी कहा कि कभी-कभी चुप रहना भी कूटनीति का एक हिस्सा हो सकता है। भारत को यह देखना होगा कि वह किस भूमिका में सबसे अधिक लाभकारी हो सकता है।


कांग्रेस की आलोचना पर प्रतिक्रिया

विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को भारतीय विदेश नीति की 'गंभीर असफलता' करार दिया था। थरूर ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि भारत 'जिम्मेदार' है। उन्होंने कहा, 'वैक्यूम खतरनाक होता है और यह हमें अन्य तरीकों से भी नुकसान पहुंचा सकता है।'


अभी तक अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में युद्ध समाप्त करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना पाए हैं।