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US-Iran Talks in Geneva: Tensions in West Asia Continue

The recent talks between the US and Iran in Geneva have drawn global attention amid rising military tensions in West Asia. Despite the discussions, no significant progress was reported, leaving the threat of war looming. Iran's Foreign Minister issued a stark warning against potential US attacks, indicating that the region could face devastating consequences. As the situation develops, the focus remains on the implications for regional stability and the future of Iran's nuclear program. Read on for a detailed overview of the ongoing negotiations and their potential impact.
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US-Iran Talks in Geneva: Tensions in West Asia Continue

US-Iran Negotiations in Geneva


अमेरिका-ईरान के बीच जिनेवा में हुई बातचीत, दोनों तरफ से बातचीत का ब्यौरा नहीं किया गया जारी


पश्चिम एशिया में अमेरिका द्वारा सैनिकों की तैनाती में वृद्धि के चलते युद्ध का खतरा बना हुआ है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच जिनेवा में महत्वपूर्ण वार्ता हुई, लेकिन वार्ता के बाद किसी भी पक्ष से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बातचीत में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई।


बातचीत पर टिकी थी पूरी दुनिया की नजर

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हो रही इस वार्ता पर वैश्विक ध्यान केंद्रित था, क्योंकि यह पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियों के साथ मेल खा रही थी। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करना और संभावित युद्ध को टालना था। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने विमान और युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी है। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी, जो वार्ता के मध्यस्थ हैं, ने कहा कि वार्ता समाप्त हो गई है और जल्द ही फिर से शुरू होगी। उन्होंने ट्वीट किया कि बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। तकनीकी स्तर की वार्ता अगले सप्ताह वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुख्यालय में होगी।


ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को दी चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा जाने से पहले चेतावनी दी कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर होंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी के लिए भी जीत की स्थिति नहीं होगी और पूरा क्षेत्र विनाशकारी युद्ध की चपेट में आ सकता है। ईरान ने पहले ही संकेत दिया है कि वह इस्राइल को भी निशाना बना सकता है, जिससे मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।


पिछले वर्ष कई दौर की वार्ता उस समय बाधित हो गई थी जब इस्राइल ने ईरान पर 12 दिन तक हमले किए और अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की। हालांकि, नुकसान की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है, लेकिन वह उस स्तर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है जहां से परमाणु हथियार बनाना संभव हो सके।