WhatsApp के लिए नया SIM-Binding नियम: जानें क्या बदलने वाला है
SIM-Binding नियम का महत्व
नई दिल्ली - यदि आप WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि SIM-Binding नियम में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। यह नियम Telegram और Signal जैसे अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी लागू होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा और सभी कंपनियों के लिए इसे मानना अनिवार्य होगा।
SIM-Binding नियम क्या है?
सरल शब्दों में, जिस मोबाइल नंबर से आपने अपना मैसेजिंग अकाउंट बनाया है, वही SIM कार्ड आपके फोन में सक्रिय रहना आवश्यक है। यदि वह SIM कार्ड फोन से हटा दी जाती है या निष्क्रिय हो जाती है, तो संबंधित ऐप की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। पहले, 6 अंकों के OTP के माध्यम से एक बार वेरिफिकेशन के बाद ऐप लगातार SIM की मौजूदगी की जांच नहीं करता था। लेकिन नए नियम के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अकाउंट हमेशा एक सक्रिय और वैध SIM से जुड़ा रहे।
सरकार की सख्ती का कारण
सरकार का तर्क है कि डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों के दुरुपयोग और साइबर अपराधों को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक है। यदि हर अकाउंट एक सत्यापित और सक्रिय SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी अकाउंट्स और धोखाधड़ी की पहचान करना आसान हो जाएगा।
1 मार्च 2026 के बाद क्या होगा?
Department of Telecommunications (DoT) ने यह नियम 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को SIM-Binding सिस्टम लागू करना होगा। इसके साथ ही, Web और Desktop लॉगिन के लिए भी नया प्रावधान लागू होगा। यदि आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो हर छह घंटे में ऑटो लॉग-आउट हो सकता है और आपको फिर से QR कोड स्कैन करके लॉगिन करना पड़ेगा।
आम उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव
यदि आपका मोबाइल नंबर सक्रिय है और वही SIM आपके फोन में है, तो आपको कोई समस्या नहीं होगी। यदि आपने SIM निकाल दी या किसी अन्य फोन में डाल दी, तो ऐप अस्थायी रूप से काम करना बंद कर सकता है। यदि नंबर रिचार्ज न होने के कारण बंद हो जाता है, तो फिर से वेरिफिकेशन की आवश्यकता हो सकती है।
डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा
सरकार का मानना है कि यह कदम डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाएगा और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा। अब यह देखना होगा कि कंपनियां 1 मार्च से पहले इस सिस्टम को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करती हैं।
