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अजीत पवार को 25,000 करोड़ के घोटाले में मिली क्लीन चिट

मुंबई की विशेष अदालत ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले में क्लीन चिट दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले में कोई आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं होता है। अजीत पवार के साथ उनकी पत्नी को भी राहत मिली है। इस फैसले के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की याचिका को भी खारिज कर दिया गया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
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अजीत पवार को 25,000 करोड़ के घोटाले में मिली क्लीन चिट

मुंबई की विशेष अदालत का फैसला

नई दिल्ली। मुंबई की सेशन कोर्ट की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित मामले में क्लीन चिट दे दी है। इस मामले में उनका नाम महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े कथित घोटाले में आया था। अदालत ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है, जिसमें अजीत पवार को निर्दोष बताया गया है।

कोर्ट ने अजीत पवार के साथ उनकी पत्नी और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी राहत दी है। विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने ईओडब्लू की सी समरी रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए कहा कि मामले में कोई आपराधिक अपराध सिद्ध नहीं होता है। अदालत ने यह भी माना कि अजीत पवार के खिलाफ एफआईआर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके दर्ज की गई थी। जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई।

इस फैसले से अजीत पवार और उनकी पत्नी को राहत मिली है, क्योंकि ईओडब्लू की जांच में उन्हें दोषमुक्त पाया गया। जांच एजेंसी को मुकदमा चलाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।