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अनिल अंबानी को मिली दोहरी मुसीबत, ED ने की कुर्की और हाई कोर्ट ने दी कानूनी झटका

अनिल अंबानी के लिए सोमवार का दिन कठिनाइयों से भरा रहा। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके मुंबई स्थित आवास पर कुर्की की कार्रवाई की, जबकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें दी गई राहत को समाप्त कर दिया। इस मामले में तीन प्रमुख बैंकों ने अपील की थी, जिसके आधार पर कोर्ट ने निर्णय लिया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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अनिल अंबानी को मिली दोहरी मुसीबत, ED ने की कुर्की और हाई कोर्ट ने दी कानूनी झटका

मुंबई में अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ीं


मुंबई: रिलायंस ग्रुप के प्रमुख अनिल अंबानी के लिए सोमवार का दिन कठिनाइयों से भरा रहा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत उनके मुंबई स्थित भव्य आवास पर कुर्की की कार्रवाई की। इस दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें दी गई बड़ी राहत को भी समाप्त कर दिया। ईडी के सूत्रों के अनुसार, कुर्क किए गए आवास की अनुमानित कीमत लगभग 3,716 करोड़ रुपये है। यह ध्यान देने योग्य है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ अब तक की गई कुल अटैचमेंट की कार्रवाई का आंकड़ा 15,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।


बॉम्बे हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बीच, बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अनिल अंबानी को एक बड़ा कानूनी झटका दिया। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस पुराने अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को 'धोखाधड़ी' घोषित करने की बैंकों की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। खंडपीठ ने दिसंबर 2025 में पारित उस आदेश को 'अवैध और विकृत' करार दिया है.


बैंकों की अपील पर आया फैसला

तीन प्रमुख बैंकों की अपील पर आया फैसला


यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र के तीन प्रमुख बैंकों- इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दायर की गई अपील से संबंधित है। इन बैंकों ने लेखा परामर्श कंपनी 'बीडीओ इंडिया एलएलपी' (BDO India LLP) की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंबानी के खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में डालने का प्रस्ताव दिया था। बैंकों का तर्क था कि ऑडिट रिपोर्ट में धन की हेराफेरी और दुरुपयोग के गंभीर प्रमाण मिले हैं, इसलिए यह कार्यवाही कानूनी रूप से पूरी तरह वैध है.


सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग पर फैसला

सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग भी ठुकराई


बहस के दौरान अनिल अंबानी के वकीलों ने खंडपीठ से अनुरोध किया कि इस आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जाए ताकि वे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकें। हालांकि, अदालत ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया। इससे पहले एकल पीठ ने आरबीआई नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगाई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने पलट दिया है। इस फैसले के बाद अब बैंकों के लिए अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खातों को धोखाधड़ी वाले खातों के रूप में वर्गीकृत करने का रास्ता साफ हो गया है.