अमेरिका-ईरान सीजफायर: पेंटागन में रक्षा मंत्री के दावे
पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन
वॉशिंगटन - अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौते के बाद पेंटागन में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ऑपरेशन को एक बड़ी सफलता बताते हुए कई महत्वपूर्ण दावे किए।
ऑपरेशन की सफलता पर मंत्री का बयान
‘ऑपरेशन ऐतिहासिक, ईरान को झुकना पड़ा’
रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” अमेरिका के लिए एक ऐतिहासिक सैन्य सफलता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को सीजफायर के लिए मजबूर होना पड़ा और उसकी सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हेगसेथ के अनुसार, अमेरिका ने 40 दिनों से भी कम समय में अपनी कुल सैन्य शक्ति का केवल 10 प्रतिशत इस्तेमाल करते हुए ईरान जैसी बड़ी सैन्य ताकत को कमजोर कर दिया।
ईरान की सैन्य स्थिति पर दावे
ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अभियान ने निर्धारित समय में सभी लक्ष्यों को प्राप्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की नौसेना लगभग समाप्त हो चुकी है, उसकी हवाई रक्षा प्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है और उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है। उनके अनुसार, ईरान का रक्षा औद्योगिक ढांचा भी भारी नुकसान झेल चुका है, जिससे उसकी युद्ध क्षमता आने वाले वर्षों में सीमित रहेगी।
परमाणु कार्यक्रम पर टिप्पणी
परमाणु कार्यक्रम पर भी बयान
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समझौते के बाद तेहरान के पास परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि ईरान की सरकार ने हालात को देखते हुए समझौता करना ही बेहतर समझा।
सीजफायर की स्थिरता पर जनरल का बयान
‘सीजफायर स्थायी नहीं, सेना तैयार’
जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया कि यह सीजफायर स्थायी शांति नहीं है, बल्कि एक अस्थायी विराम है। उन्होंने कहा कि यदि आदेश मिलता है तो अमेरिकी सेना दोबारा कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। केन ने दावा किया कि इस अभियान के दौरान ईरान में 13,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें उसके 80% हवाई रक्षा सिस्टम, 90% से ज्यादा नौसैनिक बेड़े और बड़ी संख्या में हथियार निर्माण इकाइयों को नुकसान पहुंचाया गया।
ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि, इन दावों पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे क्षेत्र में स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
