अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण शांति वार्ता आज
संभावित युद्धविराम पर चर्चा
यदि वार्ता सफल रही तो युद्धविराम को आगे बढ़ाया जाएगा, अन्यथा हमले फिर से शुरू हो सकते हैं।
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से चल रहा युद्ध फिलहाल शांत है। दोनों पक्षों ने हाल ही में बातचीत के लिए सहमति जताई थी और दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। आज, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता करेंगे। यह बैठक न केवल इन दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि वार्ता सफल होती है, तो दोनों देश आगे की बातचीत जारी रखेंगे। लेकिन यदि वे एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं होते, तो हमले फिर से शुरू हो सकते हैं।
अमेरिका के प्रतिनिधियों की सूची
इस बैठक में अमेरिका का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। इसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे। ईरानी मीडिया के अनुसार, संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस वार्ता को शांति प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण इवेंट से पहले, पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में दो दिन की छुट्टी की घोषणा की है।
ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता से पहले कहा कि यदि ईरान ने अमेरिका की शर्तों का पालन नहीं किया, तो इसके लिए यह बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में होने वाली वार्ता ईरान के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पहले, अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि युद्ध में ईरान को काफी नुकसान हुआ है। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान के ठिकानों पर 13,000 से अधिक हमले किए हैं। फिलहाल, सीजफायर के कारण हमले रोक दिए गए हैं, लेकिन अमेरिकी सेना क्षेत्र में मौजूद है और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई कर सकती है।
मुख्य वार्ता मुद्दे
अमेरिका का कहना है कि ईरान में कोई संवर्धन नहीं होगा। ईरान को अपना सारा हाई-लीवल इनरिच्ड यूरेनियम बाहर करना होगा और न्यूक्लियर फैसिलिटीज को बंद या सीमित करना होगा। अमेरिका ने यह भी कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोला जाए। यह जलडमरूमध्य दुनिया के अधिकांश तेल और गैस के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान अभी भी इसका नियंत्रण रखना चाहता है और शुल्क लेने की बात कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग पूरी तरह से खुला और सुरक्षित हो, बिना किसी रुकावट या शुल्क के। इसके अलावा, अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है।
