अमेरिका का ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त, लेकिन शांति की राह अभी लंबी
अमेरिका के विदेश मंत्री का बड़ा बयान
नई दिल्ली: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया अमेरिकी सैन्य अभियान, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' कहा गया, अब समाप्त हो चुका है। यह अभियान 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किया गया था और सभी निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया गया है। हालांकि, रुबियो ने यह स्पष्ट किया कि इससे यह नहीं समझा जाना चाहिए कि अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव पूरी तरह समाप्त हो गया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी नए संघर्ष की शुरुआत नहीं चाहता और शांति को प्राथमिकता देता है।
रुबियो ने यह भी बताया कि स्थायी शांति के लिए ईरान को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की परमाणु कार्यक्रम से संबंधित शर्तों को मानना होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा। उन्होंने हालिया सैन्य कार्रवाई को 'रक्षात्मक' बताते हुए कहा कि यह कदम केवल अमेरिकी हितों की सुरक्षा के लिए उठाया गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस समय तनाव का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका इस मार्ग को फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है ताकि फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई के लिए तैयार है। अब तक केवल दो जहाज ही इस जलडमरूमध्य से निकल पाए हैं, जबकि कई अन्य जहाज अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। रुबियो के अनुसार, लगभग 23 हजार नाविक इस संकट में फंसे हुए हैं और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित कर वैश्विक नुकसान पहुंचा रहा है।
इस बीच, चीन और अन्य देशों की भूमिका पर भी ध्यान दिया जा रहा है। रुबियो ने उम्मीद जताई कि चीन, ईरान पर दबाव बनाएगा, क्योंकि इस स्थिति का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
हालांकि संघर्षविराम लागू है, लेकिन स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर हमले के आरोप लगाए हैं, जिन्हें ईरान ने खारिज कर दिया है। कुल मिलाकर, भले ही सैन्य गतिविधियां कम हुई हों, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है।
