अमेरिका का मादुरो ऑपरेशन: ट्रंप के वादों की पोल खोलता खर्च
वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी का मामला
वॉशिंगटन: अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को अपनी बड़ी सफलता माना है, लेकिन इस ऑपरेशन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) अभियान की वास्तविकता को उजागर कर दिया है। ट्रंप ने 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि अमेरिका अब दूसरे देशों में सैन्य कार्रवाई पर अपने करदाताओं का पैसा नहीं बर्बाद करेगा। हालाँकि, हाल के आंकड़ों के अनुसार, मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिका ने पिछले एक साल में अरबों रुपये खर्च किए हैं।
एक अमेरिकी मीडिया आउटलेट की रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो के खिलाफ इस गुप्त सीआईए ऑपरेशन की जिम्मेदारी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संभाली थी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि यह अभियान असफल होता, तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से रुबियो पर आती। अमेरिका ने मादुरो को 'न्यूट्रलाइज' करने के लिए सितंबर 2025 में 'ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर' की शुरुआत की थी। डिफेंस वन मैगजीन के आंकड़ों के अनुसार, इस मिशन में एक युद्धपोत, एक परमाणु पनडुब्बी और जेराल्ड फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती की गई थी, जिनकी कुल लागत 40 अरब डॉलर आंकी गई है।
हवाई निगरानी और हमले के लिए 83 फाइटर जेट, 10 एफ-35 स्टील्थ जेट और 7 रीपर ड्रोन तैनात किए गए थे, जिनकी कुल कीमत 3 अरब डॉलर थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वेनेजुएला की घेराबंदी के लिए तैनात इन संसाधनों का ऑपरेशनल खर्च प्रति घंटे 333,000 डॉलर (लगभग 3 करोड़ रुपये) था। सितंबर से जनवरी तक चले इस मिशन में लगभग 3700 घंटे लगे, जिससे खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके अलावा, मादुरो पर 50 मिलियन डॉलर (लगभग 450 करोड़ रुपये) का इनाम रखा गया था, जो ओसामा बिन लादेन पर रखे गए इनाम से भी दोगुना था। ऑपरेशन के बाद यह राशि और हेलिकॉप्टर पायलट को 2 मिलियन डॉलर का अलग से इनाम अमेरिकी सरकारी खजाने से दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सीआईए की भूमिका महत्वपूर्ण रही। व्हाइट हाउस के आंकड़ों के अनुसार, सीआईए को इस साल संचालन के लिए 101 बिलियन डॉलर (लगभग 9 लाख करोड़ रुपये) का बजट आवंटित किया गया था। इसमें से 73 बिलियन डॉलर खुफिया जानकारी जुटाने और 28 बिलियन डॉलर सैन्य कार्रवाई के लिए थे। बताया जा रहा है कि इस बजट का एक बड़ा हिस्सा वेनेजुएला मिशन पर खर्च हुआ। इसे अमेरिका का सबसे महंगा सैन्य ऑपरेशन माना जा रहा है, जिसमें 150 हेलिकॉप्टर और 10,000 सैनिक शामिल हुए। अमेरिकी सैनिक इस हमले की योजना अगस्त 2025 से बना रहे थे।
