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अमेरिका की ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइल से हमले की तैयारी

अमेरिका ने ईरान पर संभावित हाइपरसोनिक मिसाइल हमले की योजना बनाई है, जिससे युद्ध का आर्थिक बोझ हर अमेरिकी परिवार पर पड़ रहा है। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है, जबकि ईरान के सांसदों ने अरब देशों को चेतावनी दी है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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अमेरिका की ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइल से हमले की तैयारी

अमेरिकी कमांडर ने राष्ट्रपति को हमले के विकल्पों की जानकारी दी


अमेरिका की सेंट्रल कमांड के प्रमुख ने राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान पर संभावित हमले के विकल्पों के बारे में जानकारी दी है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय नए और उन्नत हथियारों के उपयोग पर विचार कर रहा है, जिसमें 'डार्क ईगल' नामक हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है। यह मिसाइल लगभग 3,200 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य बना सकती है और ईरान के शेष बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बना सकती है।


हमले की योजना और उसके प्रभाव

एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ट्रम्प के साथ बैठक में ये विकल्प प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि यदि ट्रम्प हमले का निर्णय लेते हैं, तो एक छोटा लेकिन अत्यधिक प्रभावी हमला किया जा सकता है। इस हमले में ईरान की सैन्य क्षमताओं, उसके नेताओं और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा, बी-1बी लांसर बमवर्षक विमानों की संख्या भी क्षेत्र में बढ़ाई जा रही है, जो भारी मात्रा में हथियार ले जाने में सक्षम हैं।


युद्ध का आर्थिक बोझ

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह युद्ध की वास्तविक लागत के बारे में झूठ बोल रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेतन्याहू के निर्णय के कारण अमेरिका को लगभग 100 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जो कि अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा बताए गए खर्च से चार गुना अधिक है। अराघची ने कहा कि इस युद्ध के कारण हर अमेरिकी परिवार को हर महीने लगभग 500 डॉलर का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है।


ईरान की चेतावनी

ईरान के सांसद महमूद नबावियन ने क्षेत्र के अरब देशों के शासकों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया, तो अरब देशों के राजा और उनके महल सुरक्षित नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन देशों की सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी भूमि का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए न किया जाए।