अमेरिका की नई रणनीति: दक्षिण चीन सागर में तैनात किया गया परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर
अमेरिका का ध्यान एशिया की ओर
वाशिंगटन: वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, अमेरिका ने अपनी रणनीति को एशिया की दिशा में मोड़ दिया है, जिससे चीन की चिंताएँ बढ़ गई हैं। अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अपने परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर 'USS अब्राहम लिंकन' को तैनात किया है।
अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन
इस तैनाती के दौरान, कैरियर से F-35C स्टेल्थ फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी, जो अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। हालांकि अमेरिकी नौसेना इसे 'रूटीन पेट्रोलिंग' कह रही है, लेकिन विशेषज्ञ इसे चीन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी मानते हैं।
फाइटर जेट्स की उड़ान
अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में कुछ तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें USS अब्राहम लिंकन दक्षिण चीन सागर में फ्लाइट ऑपरेशंस करता हुआ दिखाई दे रहा है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियों पर नियंत्रण रखना और सहयोगी देशों के साथ सैन्य तालमेल को मजबूत करना है।
USS अब्राहम लिंकन की क्षमताएँ
USS अब्राहम लिंकन एक अत्याधुनिक युद्धपोत है, जो दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस है। इसमें 'F-35C लाइटनिंग II' जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट्स शामिल हैं, जिन्हें एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसके अलावा, यह 'F/A-18 सुपर हॉर्नेट' और 'EA-18G ग्रोलर' जैसे इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट से भी सुसज्जित है। यह युद्धपोत नवंबर में सैन डिएगो से रवाना हुआ था और फिलीपींस सागर तथा गुआम में अपने ऑपरेशन के बाद अब यहाँ पहुंचा है।
चीन की चिंताएँ
दक्षिण चीन सागर एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ चीन और उसके पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद चल रहा है। चीन इस समुद्री क्षेत्र पर अपना ऐतिहासिक हक जताता है, और अमेरिका की मौजूदगी उसे पसंद नहीं है। अमेरिका का मानना है कि यदि किसी एक देश का इस क्षेत्र पर एकाधिकार हो गया, तो यह वैश्विक समुद्री व्यापार को बाधित कर सकता है।
मध्य पूर्व की ओर संभावित मोड़
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि USS अब्राहम लिंकन कितने दिनों तक दक्षिण चीन सागर में गश्त करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले ही संकेत दिया है कि यदि ईरान के साथ तनाव बढ़ता है, तो इसे मध्य पूर्व की ओर भी मोड़ा जा सकता है।
