अमेरिका की वेनेजुएला के लिए नई रणनीति: तीन चरणों में बदलाव
वेनेजुएला के लिए अमेरिका की योजना
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वेनेजुएला के लिए एक तीन चरणों वाली योजना प्रस्तुत की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस योजना के तहत फिलहाल वेनेजुएला में चुनाव कराने की कोई योजना नहीं है और अमेरिका की भूमिका लंबे समय तक बनी रहेगी।
रुबियो ने कहा कि यह योजना तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित है: स्थिरीकरण, पुनर्बहाली और राजनीतिक संक्रमण। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चरणों को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति वर्षों की गिरावट का परिणाम है। पहले चरण का उद्देश्य देश में स्थिरता लाना है। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के बाद अराजकता को रोकना इस चरण का मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए अमेरिका वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कड़ी निगरानी रखेगा।
उन्होंने बताया कि प्रतिबंधों का सख्ती से पालन और समुद्री निगरानी (नौसैनिक क्वारंटीन) के माध्यम से अमेरिका के पास दबाव बनाने की सबसे मजबूत स्थिति है। दूसरे चरण में आर्थिक पुनर्बहाली पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस दौरान वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी, पश्चिमी और अन्य स्वीकृत विदेशी कंपनियों के लिए फिर से खोला जाएगा। रुबियो ने कहा कि इस चरण में बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण, बिजली व्यवस्था की मरम्मत और आर्थिक विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना शामिल होगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय मेल-मिलाप की कोशिशें भी होंगी, जिसमें विपक्षी नेताओं की रिहाई और देश छोड़ चुके लाखों वेनेजुएलावासियों की वापसी शामिल है।
तीसरे और अंतिम चरण में राजनीतिक संक्रमण की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, रुबियो ने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा, "अभी कुछ ही दिन हुए हैं। वर्षों की संस्थागत गिरावट को रातों-रात ठीक नहीं किया जा सकता।" यह योजना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका की दीर्घकालिक भागीदारी वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव डाल सकती है, जिसका सीधा असर उन बाजारों पर होगा जिन पर भारत काफी हद तक निर्भर है।
आलोचनाओं का जवाब देते हुए रुबियो ने कहा कि यह कोई तात्कालिक या बिना सोची-समझी रणनीति नहीं है। पूरी योजना कांग्रेस के साथ साझा की जा चुकी है। प्रशासन का मानना है कि जल्द चुनाव कराना देश को और अस्थिर कर सकता है, इसलिए पहले स्थिरता और आर्थिक सुधार आवश्यक हैं। यह रणनीति यह भी दर्शाती है कि अमेरिका अब सीधे राजनीतिक बदलाव के बजाय आर्थिक दबाव, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में नियंत्रण, के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। साथ ही, इसका उद्देश्य लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देना भी है।
