Newzfatafatlogo

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को और सख्त किया

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को और सख्त कर दिया है, जिसके तहत 31 जहाजों को रोका गया है। इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार को रोकना है। CENTCOM के अनुसार, यह नाकेबंदी केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी लागू की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नाकेबंदी सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति भी है। जानें इस स्थिति का प्रभाव और आगे की संभावनाएं।
 | 
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को और सख्त किया

ईरान के खिलाफ अमेरिका की नई समुद्री नाकेबंदी

वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को और अधिक कड़ा कर दिया है। यू.एस. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अब तक 31 जहाजों को या तो वापस लौटने या बंदरगाह की ओर जाने के लिए मजबूर किया गया है। यह नाकेबंदी 13 अप्रैल से प्रभावी है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार को रोकना है। CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जहाज को ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश या वहां से निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


CENTCOM ने बताया कि यह प्रतिबंध केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है। रोके गए जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर शामिल हैं, और अधिकतर ने अमेरिकी निर्देशों का पालन किया है। इस ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने भारी सैन्य तैनाती की है, जिसमें 10,000 से अधिक सैनिक, 100 से ज्यादा लड़ाकू और निगरानी विमान, तथा 17 से अधिक युद्धपोत शामिल हैं। इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर, ड्रोन, रिफ्यूलिंग और सर्विलांस विमान शामिल हैं।


इस नाकेबंदी का सबसे अधिक प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जो विश्व के प्रमुख तेल मार्गों में से एक है। यहां जहाजों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है और निकट भविष्य में हालात सामान्य होने की संभावना बेहद कम है। बाजार के संकेत भी यही बताते हैं—30 जून तक होर्मुज में ट्रैफिक सामान्य होने की उम्मीद लगभग नगण्य मानी जा रही है। इससे संबंधित ट्रेडिंग में गिरावट आई है और निवेशकों को आशंका है कि तनाव आगे भी बना रह सकता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यह नाकेबंदी केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति भी है। हालांकि सीजफायर की अवधि बढ़ाई गई है, लेकिन बातचीत में अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में अमेरिका अपनी सख्त नीति जारी रख सकता है। ट्रंप भी सीजफायर बढ़ाने के दौरान संकेत दे चुके हैं कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।


अब सबकी नजर इस पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और नाकेबंदी से जुड़े नए फैसले आने वाले समय में स्थिति को और प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि होर्मुज क्षेत्र में हालात जल्द सामान्य होने के आसार नहीं हैं और तनाव बना रह सकता है।