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अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ के बाद सख्त रुख अपनाया

अमेरिका ने भारत पर 50% का भारी टैरिफ लगाने के बाद अपने रुख को और सख्त कर दिया है। अमेरिकी आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका कोई नरमी नहीं बरतेगा। उन्होंने भारत के साथ व्यापार वार्ता को जटिल बताते हुए आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने में अड़ियल रवैया अपनाए हुए है। जानें इस व्यापारिक तनाव के पीछे की वजहें और भविष्य की संभावनाएँ।
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अमेरिका का कड़ा संदेश

भारत पर 50% का भारी टैक्स लगाने के एक दिन बाद, अमेरिका ने अपने रुख को और भी सख्त कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका इन दंडात्मक टैरिफ में कोई ढील नहीं देगा।


अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने भारत के साथ व्यापार वार्ता को "जटिल" बताते हुए आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने में "अड़ियल रवैया" अपनाए हुए है।


केविन हैसेट ने स्पष्ट रूप से कहा, "यदि भारतीय अपनी स्थिति से पीछे नहीं हटते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति ट्रंप भी पीछे हटेंगे।" यह बयान तब आया जब अमेरिका ने ब्राजील के बाद भारत पर सबसे अधिक, 50% का टैरिफ लगाया है।


हैसेट ने कहा कि भारत के साथ बातचीत कई कारणों से जटिल है। उन्होंने कहा, "इसका एक हिस्सा उस दबाव से संबंधित है जो हम रूस पर शांति समझौते के लिए डालने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि लाखों लोगों की जान बचाई जा सके।"


उन्होंने बातचीत को एक मैराथन दौड़ की तरह बताते हुए कहा कि अंतिम समझौते तक पहुंचने में कई उतार-चढ़ाव आएंगे।


ट्रंप के सलाहकार का यह बयान अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की पिछली टिप्पणियों से मेल खाता है। बेसेंट ने कहा था कि भारत पर यह भारी टैरिफ "सिर्फ रूस से तेल खरीदने की वजह से नहीं है," बल्कि व्यापारिक सौदे पर बातचीत के लंबे खिंचाव के कारण भी है।


बेसेंट ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे लगा था कि हम मई या जून तक कोई समझौता कर लेंगे... लेकिन भारत ने हमें एक तरह से टरका दिया।" उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान नई दिल्ली "थोड़ी असहयोगी" रही है और यह रिश्ता "बहुत जटिल" है।