अमेरिकी अदालत का फैसला: टैरिफ नीति में बदलाव की संभावना
ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया गया
वॉशिंगटन : अमेरिकी संघीय व्यापार अदालत ने हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध और अनुचित करार दिया है। यह फैसला व्यापार जगत में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अदालत ने कहा कि ये टैरिफ अमेरिकी व्यापार कानूनों का उल्लंघन करते हैं।
इस निर्णय के बाद ट्रंप प्रशासन को एक बार फिर से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अब यह देखना होगा कि क्या अमेरिका अपने टैरिफ को पूरी तरह से समाप्त करेगा या ट्रंप कोई नया नियम लागू करेंगे।
अदालत का महत्वपूर्ण फैसला
अमेरिकी संघीय अदालत ने 7 मई को एक महत्वपूर्ण निर्णय में ट्रंप द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह निर्णय 1974 के व्यापार अधिनियम के तहत कांग्रेस द्वारा दी गई शक्तियों का उल्लंघन है।
ट्रंप ने ये टैरिफ 24 फरवरी को 150 दिनों के लिए लागू किए थे, जो कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के करों को रद्द करने के बाद लगाए गए थे।
भारत को द्विपक्षीय समझौते का इंतजार
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी अदालतों में ट्रंप प्रशासन को मिल रहे झटकों के कारण अमेरिका की टैरिफ नीति में अनिश्चितता बढ़ गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, जब तक अमेरिका अपनी व्यापार प्रणाली को कानूनी रूप से स्थिर नहीं कर लेता, तब तक भारत को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए इंतजार करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिका अपने मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) टैरिफ को कम करने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि भारत अपने आयात शुल्क समाप्त कर दे। ऐसे में भारत द्वारा किया गया कोई भी समझौता एकतरफा हो सकता है।
