अमेरिकी कांग्रेस में ग्रीनलैंड पर कब्जे का विधेयक पेश
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की दिशा में कदम
नई दिल्ली - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड के प्रति आक्रामक नीति अब कानूनी रूप लेती दिख रही है। अमेरिका की संसद में एक महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किया गया है, जिसमें आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड को अमेरिकी कब्जे में लेने और इसे अमेरिका का आधिकारिक राज्य बनाने की मांग की गई है। यह कदम दर्शाता है कि वॉशिंगटन इस रणनीतिक क्षेत्र पर अपने इरादों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
यह विधेयक अमेरिका के निचले सदन के सांसद रैंडी फाइन द्वारा पेश किया गया है। फाइन ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में बताया कि उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने और उसे राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव सदन में रखा है। इस विधेयक के माध्यम से राष्ट्रपति ट्रंप को ग्रीनलैंड के संबंध में सभी आवश्यक राजनीतिक और कूटनीतिक कदम उठाने का अधिकार देने की बात कही गई है।
विधेयक में क्या तर्क दिए गए हैं?
विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका के प्रतिकूल देश आर्कटिक क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल कर चीन और रूस जैसी शक्तियों के प्रभाव को रोकने की आवश्यकता है। सांसद रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसे “रणनीतिक सुरक्षा संपत्ति” करार दिया है।
विधेयक में यह भी चेतावनी दी गई है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण प्रमुख आर्कटिक शिपिंग रूट्स की सुरक्षा, अमेरिकी रक्षा हितों और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। प्रस्ताव के अनुसार, पिछले वर्षों में अमेरिका की कमजोर नीतियों के कारण आर्कटिक महासागर में उसकी रणनीतिक स्थिति कमजोर हुई है, जबकि चीन और रूस ने वहां अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ाई है।
इसके साथ ही यह विधेयक अमेरिका को डेनमार्क सरकार के साथ ग्रीनलैंड के भविष्य पर औपचारिक बातचीत करने का अधिकार भी प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा भू-राजनीतिक विवाद उत्पन्न कर सकता है।
