अमेरिकी सांसद ने ट्रंप की नीतियों पर उठाए सवाल, भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट का आरोप
भारत-अमेरिका संबंधों में आई कमजोरी
वाशिंगटन: भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उनके अनुसार, यह स्थिति दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए हानिकारक साबित हो रही है।
सुब्रमण्यम ने कहा, "ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका-भारत संबंधों को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। पहले कार्यकाल में, ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ संबंधों को मजबूत किया था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।" उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में रिश्तों में गिरावट का कारण व्यक्तिगत और नीतिगत मतभेद हैं। उनके अनुसार, ट्रंप के व्यक्तिगत कारणों के चलते मोदी के साथ मजबूत आर्थिक संबंधों को नुकसान हो रहा है।
सांसद ने चेतावनी दी, "भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को कमजोर करने का कोई लाभ नहीं है। अमेरिका को भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है, जिससे हमारी आर्थिक शक्ति में वृद्धि हो सकती है।" उन्होंने कहा कि भारत कई मायनों में अमेरिका का स्वाभाविक सहयोगी है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव को एक अवसर मानते हुए, उन्होंने कहा, "यदि कंपनियां चीन से निवेश निकालना चाहती हैं, तो भारत एक स्वाभाविक भागीदार है।"
हालांकि, उन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्कों को इस दिशा में एक बाधा बताया। उनके अनुसार, टैरिफ की नीति ने भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को कमजोर किया है। उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों में ऐसे कई लोग हैं जो मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन के कार्यों ने इसे कठिन बना दिया है।"
सुब्रमण्यम ने अमेरिका की विदेश नीति पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध समाप्त करने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं हुए। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिका पर भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पिछले एक साल में खराब हुए रिश्तों को सुधारने की आवश्यकता है, जिसमें भारत के साथ संबंध भी शामिल हैं।
हाल ही में पारित नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, तकनीक और लोगों के आपसी संपर्क में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भारत-अमेरिका साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
