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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप के टैरिफ पर लगी रोक

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया है, जिसके बाद इन शुल्कों की वसूली पर रोक लग गई है। यह निर्णय वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। जानें कि यह रोक कब से प्रभावी होगी और इससे अमेरिका पर क्या आर्थिक दबाव पड़ेगा। क्या आयातकों को वसूली गई राशि वापस मिलेगी? इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें।
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप के टैरिफ पर लगी रोक

ट्रंप के टैरिफ पर रोक का ऐलान

वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ, जिन्होंने वैश्विक व्यापार में तनाव पैदा किया था, अब आधिकारिक रूप से समाप्त होने जा रहे हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इन शुल्कों को अवैध करार दिया, जिसके बाद एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा विभाग (CBP) ने बताया है कि अदालत के आदेश का पालन करते हुए मंगलवार से इन अतिरिक्त शुल्कों की वसूली पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।


IEEPA के तहत टैरिफ को किया जाएगा निष्क्रिय

सीमा शुल्क विभाग के एक बयान के अनुसार, 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली मंगलवार से समाप्त हो जाएगी। यह रोक अमेरिकी समयानुसार रात 12:01 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से प्रभावी होगी। विभाग ने आयातकों को निर्देश दिया है कि उनके कार्गो सिस्टम में सभी संबंधित ड्यूटी कोड निर्धारित समय से निष्क्रिय कर दिए जाएंगे।


अन्य शुल्कों पर नहीं पड़ेगा असर

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय पिछले शुक्रवार को आया था, और तीन दिन बाद ही प्रशासन ने टैरिफ वसूली पर रोक का ऐलान किया। हालांकि, यह निलंबन केवल IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होगा। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा शक्तियों) और धारा 301 (अनुचित व्यापार कानूनों) के तहत लगाए गए अन्य शुल्कों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इस फैसले ने ट्रंप के व्यापार नीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर अचानक ब्रेक लगा दिया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया था।


175 अरब डॉलर की कमाई और रिफंड का सवाल

सुप्रीम कोर्ट द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द करने के बाद एक नया आर्थिक मुद्दा उत्पन्न हो गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अमेरिका पर 175 अरब डॉलर से अधिक के टैरिफ राजस्व को वापस करने का दबाव बन सकता है। इन अवैध शुल्कों से प्रतिदिन 500 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई हो रही थी। फिलहाल, अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में कोई स्पष्टता नहीं दी है कि क्या आयातकों को यह राशि वापस की जाएगी या नहीं।