अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द, भारत की नजरें घटनाक्रम पर
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप का प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। इस निर्णय के बाद ट्रंप ने कोर्ट पर तीखा हमला किया और 1974 के कानून का सहारा लेते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते पहले से लागू सभी टैरिफ समाप्त हो गए हैं, जिससे व्यापार वार्ता की शर्तें प्रभावित हो सकती हैं। इस पर भारत ने कहा है कि वह अमेरिका के घटनाक्रम पर ध्यान दे रहा है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
टैरिफ रद्द होने के बाद ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसके बाद भारत सरकार ने कहा कि वह इस मामले का बारीकी से अध्ययन कर रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए गए नए कदमों का भारत पर संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। मंत्रालय ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ध्यान में रखा है। अमेरिका द्वारा किए गए कुछ निर्णयों की भी जानकारी ली जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि इनका भारत और दोनों देशों के व्यापार पर क्या असर पड़ेगा।
व्यापार समझौते की स्थिति
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि अमेरिका के साथ एक 'अंतरिम व्यापार समझौता' फरवरी के अंत तक पूरा हो जाएगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होंगे और अप्रैल से यह समझौता लागू हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 23 फरवरी से भारतीय टीम अमेरिकी अधिकारियों के साथ वार्ता करेगी। व्यापार वार्ता में भारत के उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर सहमति बनी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति में बदलाव आ गया है।
ट्रंप का टैरिफ लगाने का ऐलान
हालांकि, ट्रंप ने 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। इस प्रकार, भारत पर पहले से लागू 3 प्रतिशत टैरिफ के ऊपर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लगेगा। यह 10 प्रतिशत टैरिफ अस्थायी है और केवल 150 दिनों के लिए लागू किया जा सकता है। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पहले की तरह जारी रहेगा।
