अम्बाला में आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक अंतिम चरण में
अम्बाला का शहीद स्मारक
अम्बाला, 21 मई: हरियाणा की धरती एक बार फिर अपने इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान बनाने जा रही है। अम्बाला छावनी में बन रहा 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 21 मई 2026 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने वाला एक जीवंत 'राष्ट्रीय चेतना केंद्र' होगा।
मुख्यमंत्री का निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और आधुनिक तकनीकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक उन वीरों को श्रद्धांजलि देगा जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपने प्राणों की आहुति दी।
ऐतिहासिक तथ्यों की सटीकता
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि स्मारक में शेष कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों की प्रमाणिकता पर जोर दिया ताकि आने वाले पर्यटक और शोधकर्ता वास्तविक अनुभव प्राप्त कर सकें।
हाई-टेक डिजिटल मेमोरियल
अनिल विज ने बताया कि यह स्मारक 1857 की क्रांति पर आधारित देश का पहला आधुनिक स्मारक है, जहां इतिहास को डिजिटल तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से जीवंत किया गया है। इसमें उन गुमनाम क्रांतिकारियों को भी प्रमुखता दी गई है, जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला।
विशाल ऑडिटोरियम का दौरा
मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री ने स्मारक के ऑडिटोरियम का भी दौरा किया, जहां उन्होंने 1857 की क्रांति पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री देखी। इस अवसर पर उन्होंने स्मारक के प्रांगण में 'रुद्राक्ष' का पौधा भी रोपा।
