अयोध्या में हाईकोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार, जुर्माना लगाया
अयोध्या में प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
अयोध्या: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अयोध्या जिला प्रशासन के लापरवाह रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अदालत ने न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने और लापरवाही बरतने के लिए अयोध्या के जिलाधिकारी (DM) और गोसाईगंज नगर पंचायत पर आर्थिक दंड लगाया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए डीएम पर 7700 रुपये और नगर पंचायत पर 5500 रुपये का हर्जाना लगाया है।
भू-माफियाओं का अवैध कब्जा
यह मामला अयोध्या जिले की गोसाईगंज नगर पंचायत में स्थित एक बेशकीमती भूमि से संबंधित है। एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकारी दस्तावेजों में 'तालाब' के रूप में दर्ज भूमि पर भू-माफियाओं ने अवैध निर्माण कर लिया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि, विशेषकर जल स्रोतों और तालाबों का स्वरूप नहीं बदला जा सकता, लेकिन प्रशासन ने इस अवैध कब्जे को नजरअंदाज किया।
कोर्ट की नाराजगी
पिछली सुनवाई में सरकारी पक्ष ने कहा था कि यह भूमि तालाब नहीं बल्कि 'नॉन जेडए' (Non-ZA) श्रेणी की है। इस विरोधाभास को स्पष्ट करने के लिए कोर्ट ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से विस्तृत हलफनामा मांगा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देखा कि डीएम ने आदेश के बावजूद अपना जवाब नहीं दिया, जो कि अदालती आदेश की अवहेलना थी। वहीं, नगर पंचायत गोसाईगंज का जवाब भी बेहद सतही था। कोर्ट ने पाया कि बिना ठोस दस्तावेजों के महज औपचारिकता पूरी करने के लिए 'चलताऊ' तरीके से शपथ पत्र दाखिल किया गया था।
अगली सुनवाई का समय
न्यायालय ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए इसे न्याय के मार्ग में बाधा और कोर्ट के समय की बर्बादी माना। दोनों पक्षों पर जुर्माना लगाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारी न्यायिक आदेशों को हल्के में नहीं ले सकते। मामले की अगली सुनवाई अब फरवरी के दूसरे सप्ताह में होगी। कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि अगली तारीख तक हर हाल में स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत करें। अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण जिले के डीएम पर कोर्ट द्वारा हर्जाना लगाए जाने की खबर से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
