अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, ईडी की कार्रवाई जारी
केजरीवाल की रिहाई और उसके बाद की घटनाएँ
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की समस्याएँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। शराब नीति से जुड़े एक कथित घोटाले में विशेष अदालत से बरी होने के बाद, पार्टी और परिवार में जश्न का माहौल था। केजरीवाल ने फिर से अपनी ईमानदारी का दावा करना शुरू कर दिया था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी पर मंडरा रहे खतरे अब टल गए हैं। अगले साल पंजाब में पार्टी की संभावित जीत की चर्चाएँ भी शुरू हो गई थीं। कुछ लोग यह भी कहने लगे थे कि केजरीवाल और भाजपा के बीच कोई साजिश चल रही है। कांग्रेस ने यह प्रचारित किया कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को शराब नीति घोटाले में रिहा किया गया है ताकि उन्हें पंजाब में लाभ मिल सके। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा खुद पंजाब में जीत नहीं सकती, इसलिए वह कांग्रेस को रोकने के लिए केजरीवाल और उनकी पार्टी को मजबूत कर रही है। दूसरी ओर, केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा जेल नहीं गए, इसलिए कांग्रेस और भाजपा के बीच मिलीभगत है।
सीबीआई की अपील और ईडी की कार्रवाई
हालांकि, वास्तविकता कुछ और ही प्रतीत हो रही है। केजरीवाल की रिहाई किसी साजिश का परिणाम नहीं है। विशेष अदालत के फैसले के चार घंटे के भीतर, सीबीआई ने उच्च न्यायालय में अपील दायर कर दी। इस पर सुनवाई के दौरान, केजरीवाल ने जज बदलने की याचिका भी लगाई है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पंजाब में पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के घरों पर ईडी ने छापे मारे हैं। पहले राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर पर छापा मारा गया, उसके बाद पूर्व राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा के घर पर भी केंद्रीय एजेंसी ने कार्रवाई की। केजरीवाल की पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा मान रही है।
केंद्रीय एजेंसियों की नाराजगी
जानकार सूत्रों के अनुसार, शराब नीति घोटाले में केजरीवाल की रिहाई के समय विशेष अदालत की टिप्पणियों ने केंद्रीय एजेंसियों को झटका दिया है। अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारियों के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए थे, जिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी। इससे एजेंसी के अधिकारियों में नाराजगी बढ़ी है। राजनीतिक दबाव की खबरें भी आ रही हैं। कहा जा रहा है कि केजरीवाल के शराब नीति घोटाले से बरी होने का बदला उनकी पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के जरिए लिया जा रहा है। एजेंसियाँ उन नेताओं को निशाना बना रही हैं, जो कारोबारी हैं और जिनको केजरीवाल ने राज्यसभा भेजा था। संजीव अरोड़ा एक बड़े कारोबारी हैं और उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। हाल ही में उनसे इस्तीफा लिया गया और विधानसभा के उपचुनाव में जीतकर वे राज्य सरकार में मंत्री बने। इसी तरह, अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक हैं और उनका एक बड़ा कारोबारी समूह है। हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा के उप नेता पद से हटाने के बाद, केजरीवाल ने अशोक मित्तल को उप नेता बनाया। इसलिए इन नेताओं के खिलाफ छापे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं लगते।
