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असम के मुख्यमंत्री ने पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। खेड़ा ने आरोप लगाया है कि सरमा की पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं। सरमा ने इन आरोपों को झूठा और राजनीतिक साजिश बताया है। इस विवाद के चुनावी प्रभाव पर चर्चा हो रही है, खासकर जब असम में चुनाव नजदीक हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और दोनों पक्षों के तर्क।
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असम के मुख्यमंत्री ने पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी

मुख्यमंत्री का बयान

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है। उन्होंने खेड़ा के आरोपों को 'दुर्भावनापूर्ण, झूठा और राजनीतिक साजिश' करार दिया है.


पवन खेड़ा के आरोप

पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं। उनके अनुसार, हिमंत की पत्नी के पास संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के सक्रिय पासपोर्ट हैं.


कानूनी कार्रवाई की तैयारी

हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मेरी पत्नी और मैं अगले 48 घंटों में पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और सिविल मानहानि का मामला दर्ज करेंगे। वह अपनी लापरवाह और अपमानजनक टिप्पणियों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे.'


सरमा का दृष्टिकोण

उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा का यह आरोप कांग्रेस पार्टी की हताशा को दर्शाता है, खासकर जब असम में चुनाव नजदीक हैं। सरमा ने लिखा, 'ऐसे हमले उनकी कमजोर स्थिति को उजागर करते हैं।' उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया और कहा कि अदालत में सच्चाई सामने आएगी.


दस्तावेजी सबूत

पवन खेड़ा ने कहा कि उनके पास UAE का गोल्डन कार्ड, एंटीगुआ और बारबुडा का पासपोर्ट, और मिस्र का पासपोर्ट जैसे दस्तावेजी सबूत हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि एक भारतीय नागरिक के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं.


केंद्रीय गृह मंत्री का संदर्भ

पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस विवाद में शामिल किया, यह कहते हुए कि हिमंत बिस्वा सरमा अमित शाह के 'गोद लिए बेटे' जैसे हैं. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या शाह को इस मामले की जानकारी है.


सरमा का विश्वास

हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि असम की जनता इस तरह की प्रचारबाजी से प्रभावित नहीं होगी. उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी सरकार को 100 से अधिक सीटों का जनादेश मिलेगा. यह विवाद असम विधानसभा चुनाव से पहले उठ खड़ा हुआ है, जिससे वोटिंग पैटर्न पर असर पड़ सकता है.