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असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश, बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

असम सरकार ने आज यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर एक महत्वपूर्ण बिल पेश किया है, जिसका उद्देश्य बहुविवाह पर रोक लगाना और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना है। सीएम सरमा ने इस विधेयक के माध्यम से विवाह और तलाक से जुड़े कानूनों को सरल बनाने की बात की है। यदि यह बिल पारित होता है, तो असम UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। जानें इस बिल के पीछे के उद्देश्य और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
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असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश, बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

असम सरकार का नया बिल


आज, सोमवार को असम सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर एक नया बिल विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना है। संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने हिमंता बिस्वा सरमा सरकार की ओर से यह बिल प्रस्तुत किया।


UCC बिल का उद्देश्य

UCC बिल का लक्ष्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कानूनों को एकीकृत करना और उन्हें व्यवस्थित करना है। इस विधेयक के माध्यम से बहुविवाह पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।


सीएम सरमा का बयान

मुख्यमंत्री सरमा ने इस बिल के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को सरल बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि विवाह के लिए पुरुषों और महिलाओं की न्यूनतम उम्र क्रमशः 21 और 18 वर्ष निर्धारित की गई है।


उन्होंने यह भी कहा कि यह बिल लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिससे पार्टनर्स के अधिकार सुनिश्चित होते हैं और शादी से पहले जन्मे बच्चों को भी अधिकार मिलते हैं। सीएम ने स्पष्ट किया कि यह कानून असम में रहने वाली किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा।


UCC का पूर्व अनुभव

सीएम सरमा ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में यह घोषणा की थी कि राज्य सरकार 21 से 26 मई तक चलने वाले विधानसभा सत्र में इस कानून को पेश करेगी। उन्होंने इस कानून के पीछे चार मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख किया, जिनमें शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामले शामिल हैं।


यदि असम में यह बिल पारित होता है, तो यह UCC लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात में UCC लागू किया जा चुका है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनवरी में कहा था कि इस कानून ने महिलाओं को सशक्त बनाया है और उनकी सुरक्षा को बढ़ाया है।