असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा का दावा
असम विधानसभा में UCC विधेयक का पारित होना
नई दिल्ली: असम विधानसभा ने विपक्ष के कड़े विरोध और हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद, असम अब देश का तीसरा राज्य बन गया है, जहां UCC लागू होगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे महिलाओं के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
UCC विधेयक के प्रमुख प्रावधान
इस विधेयक में बहुविवाह प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है। विवाह, तलाक और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील मामलों में सभी नागरिकों पर समान नियम लागू होंगे। नए कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बहुविवाह या द्विविवाह के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे सात साल तक की कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य
लिव-इन का पंजीकरण हुआ अनिवार्य
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। अब बिना शादी के एक साथ रहने वाले जोड़ों को अपनी स्थिति का सरकारी पंजीकरण कराना होगा। यदि कोई जोड़ा निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं कराता है, तो उन्हें तीन महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।
अनुसूचित जनजातियों को छूट
जनजातियों को मिली बड़ी छूट
इस नए कानून की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि असम की सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए सभी अनुसूचित जनजातियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों को इस कानून से बाहर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए इस संतुलन को आवश्यक बताया है।
महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा
महिला सशक्तिकरण का बड़ा दावा
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सदन में कहा कि आर्थिक उतार-चढ़ाव होते रहते हैं, लेकिन महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार का तर्क है कि विवाह और तलाक के समान नियम महिलाओं को बेहतर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। लिव-इन को नियमित करने का उद्देश्य भी महिलाओं के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा है।
विपक्ष की चिंताएं
विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस और एआईयूडीएफ जैसे विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया है। उनका कहना है कि जब अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से बाहर रखा गया है, तो यह कानून 'समान' नहीं रह जाता। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप में जेल की सजा का प्रावधान नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
