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आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध से 16 लोगों की मौत, स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध पीने से 16 लोगों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों में बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं, और कई को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने स्वास्थ्य सुरक्षा के मुद्दों को उजागर किया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बारे में।
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आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध से 16 लोगों की मौत, स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी

आंध्र प्रदेश में दूध पीने से हुई मौतों का मामला

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां मिलावटी दूध के सेवन से मरने वालों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। इस बीच, तीन अन्य लोगों का इलाज राजमहेन्द्रवरम के अस्पतालों में चल रहा है, जबकि एक व्यक्ति स्वस्थ होकर घर लौट चुका है। यह घटना फरवरी के मध्य की है, जब लालचेरुवु क्षेत्र में सप्लाई किए गए दूध को पीने के बाद लोग अचानक गंभीर बीमारियों का शिकार हो गए। पीड़ितों में उल्टी, तेज पेट दर्द, पेशाब न आना और किडनी के काम करने में रुकावट जैसी समस्याएं देखी गईं। 22 फरवरी को चौदेश्वरननगर और स्वरूपनगर से कई मरीजों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की।

हाल ही में जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि लैब रिपोर्ट में दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले तत्व की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इसी कारण पीड़ितों की किडनी फेल हो गई और उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे 16 लोगों की जान चली गई। अधिकारियों के अनुसार, नरसपुरम गांव की एक डेयरी यूनिट इस मामले का मुख्य केंद्र है, जहां से 100 से अधिक परिवारों को दूध की सप्लाई की जाती थी। शक के आधार पर इस यूनिट की सप्लाई को तुरंत रोक दिया गया है। 16 फरवरी से 21 मार्च के बीच 20 लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 16 की मौत हो गई और अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पीड़ितों में बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। कई मरीजों को डायलिसिस और वेंटिलेटर पर रखा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं और एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम का गठन किया गया है, जिसमें डॉक्टर, विशेषज्ञ और निगरानी अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने मृतकों के परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और संदिग्ध दूध विक्रेता को हिरासत में लिया गया है। फोरेंसिक टीमों ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं, जबकि पशुपालन विभाग दूध, पशु आहार और पानी के नमूनों की जांच कर रहा है ताकि मिलावट के असली कारणों का पता लगाया जा सके।

सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बाहरी विशेषज्ञों और वरिष्ठ चिकित्सकों को भी तैनात किया है, ताकि उपचार और जांच में कोई कमी न रह जाए। यह घटना न केवल लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण है, बल्कि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ का खतरनाक चेहरा भी उजागर करती है।