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आरएसएस का संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव, यूपी और उत्तराखंड को जोड़ा जाएगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करने की योजना बना रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर एक नया उत्तर क्षेत्र बनाने का निर्णय लिया गया है। यह बदलाव अगले साल मार्च से लागू होगा और इसमें कुल 10 संभाग स्थापित किए जाएंगे। जानें इस बदलाव के पीछे की रणनीति और इसके संभावित प्रभाव।
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आरएसएस का संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव, यूपी और उत्तराखंड को जोड़ा जाएगा

आरएसएस में महत्वपूर्ण संगठनात्मक परिवर्तन


लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन करने की योजना बना रहा है। इस बदलाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संगठनात्मक ढांचे में विशेष परिवर्तन देखने को मिलेंगे। संघ ने इन दोनों राज्यों को मिलाकर एक नया उत्तर क्षेत्र बनाने का निर्णय लिया है, हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


सूत्रों के अनुसार, ये परिवर्तन विधानसभा चुनाव के बाद अगले साल मार्च से लागू किए जाएंगे। यह क्षेत्र संगठनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इन राज्यों में संघ की शाखाओं और कार्यकर्ताओं की संख्या काफी अधिक है। हाल ही में हरियाणा के पानीपत में आरएसएस की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आयोजित की गई थी, जहां संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के प्रारूप को अंतिम रूप दिया गया। इस नई व्यवस्था के तहत देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में विभाजित करने की योजना बनाई गई है। क्षेत्र स्तर पर संगठन के समन्वय और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जबकि संभाग स्थानीय शाखाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।


इस बदलाव के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 10 संभाग स्थापित किए जाएंगे, जिनमें लखनऊ, बरेली, कानपुर, झांसी, मेरठ, ब्रज प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर और काशी शामिल होंगे। यदि ऐसा होता है, तो प्रांत की वर्तमान संरचना समाप्त कर दी जाएगी। इसके साथ ही, संगठन का ध्यान क्षेत्र और संभाग इकाइयों पर केंद्रित रहेगा।