आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा से संघ की दूरी पर उठाए सवाल
आरएसएस और भाजपा के बीच की दूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में संघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच की दूरी को स्पष्ट किया है। यह बात उन्होंने कोलकाता में संघ के शताब्दी समारोह के दौरान कही, जहां उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा के दृष्टिकोण से आरएसएस को देखने की आवश्यकता नहीं है। भागवत ने कहा कि भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों के कार्य करने के तरीके अलग हैं, जबकि संघ का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और लोगों को एकजुट करना है।
इस बयान के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? क्या भागवत किसी विशेष कारण से असंतुष्ट हैं? उनके इस तरह के बयान भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद आए हैं। सूत्रों के अनुसार, संघ द्वारा विचार किए जा रहे नामों में नबीन का नाम शामिल नहीं था। इसके अलावा, भाजपा की केंद्र सरकार की कुछ नीतियों और राज्यों के कार्यों से संघ के लोग संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें यह फीडबैक मिला है कि हिंदू समाज में पहले जैसा उत्साह नहीं है और भाजपा भी अन्य पार्टियों की तरह कार्य कर रही है। इसलिए, संघ को इस तरह के बयान देने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
